
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जमा पर ब्याज दर 8.25% सालाना तय की है। इस दर पर 1 लाख रुपये के PF बैलेंस पर एक साल में करीब 8,250 रुपये का ब्याज मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक ब्याज इस बात पर निर्भर करता है कि हर महीने खाते में कितना बैलेंस रहा और साल के दौरान कितना योगदान किया गया।
वित्त वर्ष 2025-26 का EPF ब्याज पिछले महीने खाते में क्रेडिट किया गया है। 8.25% सालाना ब्याज दर के हिसाब से मासिक ब्याज दर करीब 0.688% बैठती है। EPF का ब्याज हर महीने के क्लोजिंग बैलेंस के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है। इसलिए खाते में जमा रकम और हर महीने होने वाले योगदान के हिसाब से ब्याज की राशि अलग-अलग हो सकती है।
आइए जानते हैं कि 8.25% सालाना ब्याज दर के हिसाब से हर महीने EPF पर कितना ब्याज मिलता है और इसकी गणना कैसे की जाती है।
EPF पर ब्याज की गणना हर महीने खाते के क्लोजिंग बैलेंस के आधार पर की जाती है। पूरे वित्त वर्ष के दौरान जमा हुआ ब्याज बाद में सदस्य के EPF खाते में क्रेडिट किया जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर मासिक ब्याज दर करीब 0.688% है और खाते में पूरे महीने 1 लाख रुपये का बैलेंस बना रहता है, तो उस महीने करीब 688 रुपये का ब्याज मिलेगा। अगर पूरे साल बैलेंस 1 लाख रुपये ही रहता है, तो साल भर में करीब 8,250 रुपये का ब्याज बनता है।
EPF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं। नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPF और दूसरा हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है।
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर 50,000 रुपये प्रति महीने है और PF का योगदान 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा के आधार पर किया जा रहा है। ऐसे में योगदान इस तरह होगा:
जब EPF का ब्याज खाते में क्रेडिट हो जाता है, तो सदस्य अपने EPFO ई-पासबुक के जरिए अपडेटेड रकम देख सकते हैं। इसके लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:
EPF का ब्याज पूरे वित्त वर्ष के लिए जमा होता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर सदस्य की पासबुक में तुरंत दिखाई देने लगे। इसका एक कारण यह है कि ब्याज दर को पहले आधिकारिक तौर पर नोटिफाई किया जाता है। इसके बाद EPFO ब्याज क्रेडिट करने की प्रक्रिया शुरू करता है।
EPFO में बड़ी संख्या में सदस्य होने के कारण ब्याज का क्रेडिट और पासबुक में अपडेट चरणों में हो सकता है। कुछ मामलों में KYC अधूरा होने या आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar authentication) से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण भी देरी हो सकती है।
कुछ निष्क्रिय खातों पर ब्याज क्रेडिट से जुड़े अलग नियम लागू हो सकते हैं। इससे भी ब्याज पासबुक में दिखाई देने में समय लग सकता है।
इसलिए अगर EPF का ब्याज तुरंत पासबुक में दिखाई नहीं दे रहा है, तो सदस्य को क्रेडिट प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ सकता है। इसके बाद भी ब्याज अपडेट न हो तो EPFO के पास अपनी समस्या दर्ज कराई जा सकती है।
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