EPF vs EPS: दोनों में क्या होता है अंतर? जानिए रिटायरमेंट के लिए किसमें निवेश करना आपके लिए होगा फायदेमंद

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए EPF और EPS दोनों में निवेश करना सबसे बेहतर है। EPF से आपको रिटायरमेंट के समय एकमुश्त राशि और अच्छा ब्याज मिलता है, जबकि EPS से हर महीने नियमित पेंशन मिलती है। इसलिए आप अपनी जरूरत के हिसाब से इन दोनों में से किसी भी स्कीम में निवेश कर सकते हैं।

Manali Rastogi
पब्लिश्ड10 Nov 2025, 05:35 PM IST
EPF vs EPS: दोनों में क्या होता है अंतर? जानिए रिटायरमेंट के लिए किसमें निवेश करना आपके लिए होगा फायदेमंद
EPF vs EPS: दोनों में क्या होता है अंतर? जानिए रिटायरमेंट के लिए किसमें निवेश करना आपके लिए होगा फायदेमंद(Pixabay)

अगर आप रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहे हैं, तो कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) भारत की दो सबसे विश्वसनीय योजनाएं हैं। ये दोनों योजनाएं कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम, 1952 के अंतर्गत आती हैं और नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित बचत का साधन देती हैं।

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EPF लंबे समय की बचत के लिए एक सुरक्षित और अनुशासित तरीका है, जबकि EPS रिटायरमेंट के बाद नियमित आय (पेंशन) का साधन प्रदान करती है।

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) क्या है?

EPF (Employees’ Provident Fund) केवल उन कर्मचारियों के लिए है जो EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) से पंजीकृत कंपनियों में काम करते हैं।

  • किसी भी कंपनी में अगर 20 से अधिक कर्मचारी हैं, तो उसे यह योजना लागू करनी जरूरी होती है।
  • इस योजना में कर्मचारी और नियोक्ता (Employer) दोनों अपने वेतन (बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता) का 12%-12% योगदान करते हैं।
  • नियोक्ता द्वारा दी गई रकम में से 3.67% EPF में और 8.33% EPS में जाता है।

EPF पर 2024-25 के लिए 8.25% ब्याज दिया जाता है, जिसे हर साल समीक्षा की जाती है।

  • EPF में किया गया योगदान आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख तक टैक्स छूट देता है।
  • हर साल 2.5 लाख तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता।
  • हालांकि, EPF की राशि को निकालते समय कुछ शर्तों के तहत ही यह टैक्स-फ्री होती है।

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कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) क्या है?

EPS (Employees’ Pension Scheme) रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन देने की योजना है।

  • इसमें केवल नियोक्ता (Employer) ही योगदान करता है, जो कि वेतन का 8.33% होता है।
  • इस योजना के तहत कम से कम 10 साल तक सेवा करने के बाद और 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर कर्मचारी को मासिक पेंशन मिलती है।
  • अगर कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो नामांकित व्यक्ति को यह पेंशन मिलती रहती है।

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EPF और EPS से मिलने वाला लाभ

EPF और EPS मिलकर नौकरीपेशा लोगों को दोहरा लाभ देते हैं:

  • EPF से सुरक्षित और टैक्स-बचत वाली बचत।
  • EPS से रिटायरमेंट के बाद हर महीने निश्चित पेंशन।

(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करें और योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बाजार की स्थितियां और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।)

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