PF vs EPS: पीएफ और ईपीएफ में क्या है अंतर? रिटारमेंट के बाद कैसे होती है पेंशन की कैलकुलेशन, जानें पूरी डिटेल

PF vs EPS: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार, EPF और EPS दो अलग-अलग स्तंभ हैं। EPF आपकी एकमुश्त बचत है, जबकि EPS वह गारंटीड इनकम है जो बुढ़ापे के लिए होती है।

Shivam Shukla
पब्लिश्ड24 Jan 2026, 02:15 PM IST
PF vs EPS
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EPS Pension Calculation Formula: नौकरीपेशा लोगों की पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी और भविष्य का सहारा उसके प्रोविडेंट फंड (PF) और पेंशन स्कीम (EPS) पर टिका होता है। लेकिन अक्सर कर्मचारी इस उलझन में रहते हैं कि उनकी सैलरी से कटने वाली रकम आखिर किन दो हिस्सों में बंटती है। इसके साथ ही रिटायरमेंट के बाद उन्हें हाथ में कितना पैसा मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार, EPF और EPS दो अलग-अलग स्तंभ हैं। EPF आपकी एकमुश्त बचत है, जबकि EPS वह गारंटीड इनकम है जो बुढ़ापे के लिए होती है। आइए EPF और EPS की कैलकुलेशन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

PF और पेंशन फंड में अंतर

कर्मचारी के वेतन से कटने वाला 12 प्रतिशत हिस्सा सीधे उसके EPF खाते में जमा होता है। लेकिन एंप्लायर का 12 प्रतिशत योगदान दो हिस्सों में बंटता है। एंप्लायर के कंट्रीब्यूशन का 8.33% भाग कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है, जबकि 3.67% हिस्सा EPF में जाता है। बता दें कि सरकार ने पेंशन के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये तय की है। अगर आपका वेतन इस सीमा से अधिक भी है, तभी आपका पेंशन फंड इसी सीमा के आधार पर तय होता है EPF की रकम पर आपको सालाना ब्याज मिलती है और इसे आप रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर निकाल सकते हैं, लेकिन पेंशन की नियम थोड़े अलग हैं।

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कैसी तय होती है आपकी मंथली पेंशन?

बता दें कि पेंशन की रकम आपकी कुल जमा पूंजी पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि इसके लिए एक तय फॉर्मूला काम करता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के मुताबिक, आपकी पेंशन का निर्धारण आपकी पेंशन योग्य सेवा और पेंशन योग्य वेतन के आधार पर तय होती है। इसका फॉर्मूला: पेंशन योग्य वेतन x पेंशन योग्य सेवा/ 70 है।

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सदस्य की मौत के बाद परिवार को पेंशन

पेंशन योजना (EPS) का सबसे बेहतरीन फीचर फैमली पेंशन है। अगर किसी ईपीएफ सदस्य की सर्विस के दौरान या पेंशनभोगी की मौत हो जाती है, तो उनके परिवार को पेंशन मिलती है। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, ईपीएफओ सदस्य की पति या पत्नी को सदस्य का 50 प्रतिशत हिस्सा आजीवन मिलता है। उदाहरण के लिए: अगर किसी सदस्य की पेंशन 7,500 रुपये बन रही है, तो उसकी मौत के बाद उसकी पत्नी को 3750 रुपये प्रति महीने की पेंशन मिलेगी।

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सदस्य के दो बच्चों को भी पेंशन

इसके साथ ही, परिवार के दो बच्चों को भी 25-25 प्रतिशत की दर से बाल पेंशन (Child Pension) दी जाती है। यह पेंशन 25 साल की उम्र होने तक मिलती है। अगर बच्चे अनाथ हो जाते हैं, तो यह रकम बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक कर दी जाती है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से कम न हो।

अर्ली और हायर पेंशन का विकल्प

गौरतलब है कि आमतौर पर 58 साल की उम्र के बाद रिटायर होने पर कर्मचारी को पेंशन मिलती है, लेकिन कर्मचारी 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन का लाभ उठा सकता है। हालांकि, अर्ली पेंशन लेने पर कर्मचारी को कुछ नुकसान भी होता है। इसके तहत हर साल 4% पेंशन में कटौती कर दी जाती है। वहीं, अगर आप 58 साल के बाद भी काम करना जारी रखता है और पेंशन टाल देता है, तो उसकी पेंशन में 4% की सालाना बढ़ोतरी का भी प्रावधान है।

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