EPF vs VPF Difference: अगर आप नौकरी करते हैं, तो आपका EPF कटता होगा, लेकिन कुछ लोग अपनी सेविंग बढ़ाने के लिए VPF भी कटवाते हैं। VPF का फुल फॉर्म वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड है। क्या आप जानते हैं कि आखिर ये VPF क्या है और ये EPF से कितना अलग होता है। अगर नहीं, तो चलिए समझते हैं VPF के बारे में सबकुछ
क्या होता है VPF?
नौकरी के बाद अब सबसे बड़ी टेंशन होती है कि बुढ़ापा कैसे कटेगा। इसी बुढ़ापे के लिए VPF एक मजबूत सहारा बन सकता है। VPF यानी वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड,EPF की तरह होता है। जैसे EPF में सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा कटता है, लेकिन VPF में आप अपनी मर्जी से पैसे कटवा सकते हैं। आसान शब्दों में कहें, तो ये भी आपकी सेविंग का हिस्सा होता है।
कितना जमा कर सकते हैं फंड?
जब भी सेविंग की बात आती है, तो सवाल आता है कि VPF में कितना पैसा जमा कर सकते हैं। VPF के नियमों के अनुसार, अपनी बेसिक सैलरी का 100 फीसदी हिस्सा भी आप VPF में जमा कर सकते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आप आपको रिटायरमेंट के बाद मोटी रकम मिलेगी। EPF की तरह VPF में भी निवेश करने वाले को मोटा ब्याज मिलता है। बता दें कि VPF पर सालाना 8.25 फीसदी का ब्याज मिलता है। इसके साथ ही ये रिस्क फ्री होती है, इसमें पैसा डूबने का खतरा नहीं होता है।
टैक्स में भी मिलता है फायदा
VPF टैक्स बचाने का भी एक शानदार तरीका है। इसमें जमा की गई रकम धारा 80C के तहत टैक्स फ्री होती है। इसमें 1.5लाख रुपये की छूट मिलती है। अगर EPF और VPF को मिलाकर जमा की गई रकम 2.5 लाख से कम है, तो उस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है।
VPF में कैसे करें निवेश?
VPF यानी Voluntary Provident Fund शुरू करना बहुत आसान है, इसके लिए आपको अपनी कंपनी के HR या Payroll विभाग को बताना होता है कि आप इसमें योगदान करना चाहते हैं और एक फॉर्म भरकर यह तय करना होता है कि सैलरी से कितना अतिरिक्त पैसा EPF में डालना है। कई कंपनियां ये सुविधा ऑनलाइन पोर्टल पर भी देती हैं और प्रक्रिया पूरी होने के बाद हर महीने आपकी सैलरी से तय राशि VPF के रूप में कट जाती है। अगर आप नौकरी बदलते हैं तो आपका EPF और VPF अकाउंट नए नियोक्ता के पास ट्रांसफर हो जाता है, जिससे आपका पैसा सुरक्षित रहता है और निवेश जारी रहता है, साथ ही आप EPF पासबुक, UMANG ऐप या DigiLocker के जरिए कभी भी अपना बैलेंस देख सकते हैं।