EPFO: अगर आप नौकरी करते हैं और अपने भविष्य के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाते में पैसा जमा करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। भारत में नौकरी करने वालों के लिए पीएफ एक ऐसी सेविंग है जिस पर भरोसा किया जा सकता है। हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम जमा होती है और समय के साथ यह बड़ा फंड बनकर तैयार हो जाता है। दरअसल, भारत सरकाकर ने किसी सेवारत कर्मचारी को नौकरी के बाद वित्तीय सुरक्षा देने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की स्थापना की है। इसमें कर्मचारी के वेतन का कुछ भाग यानी मूल वेतन का 12.5 फीसदी और इतनी ही राशि नियोक्ता द्वारा जमा की जाती है।
इस निधि के नियंत्रण के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्थापना के लिए अध्यादेश 15 नवंबर 1951 को जारी किया गया था। इसके बाद 4 मार्च 1952 को संगठन की स्थापना की गई। इसी संगठन में कर्मचारी और नियोक्ता का योगदान जमा कराया जाता है। नौकरी की समाप्ति पर पेंशन और एक मुश्त फंड, नौकरी के दौरान मृत्यु होने पर परिवार के आश्रितों को सहारा जैसे प्रावधानों को इसमें शामिल किया गया।
जानिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन क्या काम करता है
कर्मचारी और नियोक्ता के द्वारा दिए जाने वाले योगदान का नियंत्रण कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से किया जाता है। जब कर्मचारी रिटायर होते हैं तो उसमें से कुछ राशि एक मुश्त दी जाती है। इसके बची हुई रकम को हर महीने बतौर पेंशन दी जाती है। इकोनॉमिक टाइइम्स में छपी खबर के मुताबिक, देश में करीब 25 लाख करोड़ कमर्चारी भविष्य निधि खाते हैं। जब से सेंट्रल डिपोजिटरी सर्विस इंडिया लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली नेशनल पेंशन स्कीम की शुरुआत हुई है. तब से ज्यादातर प्राइवेट सेक्टर कमर्चारियों के पेंशन खाते इसी के अंर्तगत खुलने लगे हैं।
कमर्चारी EPFO में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के खातों की संख्या बढ़ गई है। जिन कर्मचारियों को सरकारी सुविधाएं नहीं मिलती है, यानी जो प्राइवेट सेक्टरो में काम करते हैं वे अपने आने वाले समय की वित्तीय सुरक्षा के लिए EPFO में निवेश करते हैं। इसमें जमा राशि पर बैंक कमर्चारी को उच्च दर पर ब्याज देती है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के लिए कौन अप्लाई कर सकते हैं?
इस योजना में सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले वे सभी कमर्चारी शआमिल हो सकते हैं। हालांकि सभी प्राइवेट संस्थान कमर्चारी भविष्य निधि में निवेश नहीं करते हैं। इसमें कर्मचारी के वेतन से कुछ राशि और उतनी ही राशि नियोक्ता द्वारा दी जाती है। दोनों की जमा राशि को कमर्चारी भविष्य निधि संगठन में जमा किया जाता है। इसके लिए कर्मचारियों का UAN अकाउंट खुलवाया जाता है। जिसे नौकरी बदलने के बाद दूसरे संगठन से भी लिंक किया जा सकता है।
PF पर मिलने वाले ब्याज पर भी लगता है टैक्स
पीएफ (प्रोविडेंट फंड) पर ब्याज पर आमतौर पर टैक्स नहीं लगता है, बशर्ते आपका सालाना योगदान 2.5 लाख रुपये (प्राइवेट कर्मचारियों के लिए) से अधिक न हो। यदि आपका योगदान इस सीमा से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि पर अर्जित ब्याज कर योग्य हो जाता है। इसके अलावा, कुछ विशेष परिस्थितियों में निकासी पर भी टैक्स लग सकता है, जो 5 साल की निरंतर सेवा से पहले निकासी पर लागू होता है।
रिटायरमेंट के बाद क्या होता है?
नौकरी छूटते ही योगदान रुक जाता है। रिटायरमेंट के बाद आपकी ओर से और नियोक्ता की ओर से पीएफ में योगदान बंद हो जाता है। इस स्थिति में आप कर्मचारी (employee) की कटैगरी में नहीं आते हैं। ब्याज टैक्सेबल हो जाता है। इसलिए, आपकी रिटायरमेंट के बाद जो भी ब्याज आपके पीएफ खाते में जमा होता है, वह अब टैक्सेबल (टैक्स योग्य) माना जाएगा।