घर खरीदने के बाद ज्यादातर सैलरीड लोगों की जिंदगी में एक ऐसा पल आता है, जब वे EPF अकाउंट और होम लोन स्टेटमेंट को साथ-साथ देखकर सोचते हैं कि क्या EPF का पैसा निकालकर पूरा होम लोन चुका देना सही रहेगा? EMI से आजादी का सपना जितना सुकून देता है, उतना ही यह फैसला आपके भविष्य की फाइनेंशियल सेहत पर भारी भी पड़ सकता है। इस मामले में फाइनेंस एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि होम लोन चुकाने के लिए EPF की रकम निकालना लंबे समय में काफी महंगा पड़ सकता है, जिसे ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
EPF है रिटायरमेंट का मजबूत सहारा, कोई फालतू कैश नहीं
EPF को रिटायरमेंट के लिए बनाया गया है। ये एक मजबूरी वाला लंबे समय का निवेश है। कर्मचारी और कंपनी दोनों की तरफ से पैसा जाता है और सालाना करीब 8.25 प्रतिशत ब्याज मिलता है, वो भी कंपाउंडिंग के साथ। सबसे खास बात यह है कि ब्याज टैक्स-फ्री है। इसलिए ये सैलरीड लोगों के लिए सबसे अच्छा और कम रिस्क वाला तरीका पैसा बढ़ाने का है। EPF में जमा राशि पर मौजूदा समय में करीब 8.25% की टैक्स‑फ्री ब्याज मिलती है, जबकि होम लोन पर ब्याज दर सामान्यत 7.5% के आसपास रहती है।
पहली नजर में लगता है कि EPF का पैसा निकालकर लोन चुकाना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह तुलना केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। EPF पैसा आपके भविष्य के लिए सुरक्षित किया गया निवेश है, और इसे समय से पहले निकालने से लंबी अवधि में रिटायरमेंट फंड पर बड़ा असर पड़ सकता है।
EPF निकालने के फायदे और नुकसान
EPF से होम लोन चुकाने के कुछ फायदे हो सकते हैं, जैसे कि EMI का बोझ तुरंत कम होना या नकदी संकट में राहत मिलना। नए नियमों के तहत, कम से कम 10 साल का PF योगदान होने पर आप होम लोन के मुख्य और ब्याज दोनों हिस्सों के लिए EPF का पैसा निकाल सकते हैं। लेकिन आपको बता दें कि इसके नुकसान भी है, आपका रिटायरमेंट फंड घट जाएगा और टैक्स‑फ्री कंपाउंडिंग का लाभ भी खो सकता है।
कब EPF का पैसा इस्तेमाल करना समझदारी है?
जानकारों के मुताबिक, EPF का पैसा सिर्फ कुछ विशेष परिस्थितियों में ही होम लोन चुकाने के लिए उपयोग करना चाहिए। इनमें रिटायरमेंट के नजदीक होना, लोन की ब्याज दर EPF की ब्याज दर से कहीं अधिक होना, या गंभीर नकदी संकट में होना शामिल है। अन्य परिस्थितियों में, बेहतर है कि EPF को सुरक्षित रखा जाए और होम लोन को नियमित EMI से चुकाया जाए। EPF आपके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ है और इसे सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही प्रयोग करना चाहिए।