
EPFO New Scheme 2025: भारत में काम करने वाले लगभग सभी कर्मचारियों का एक पीएफ (प्रोविडेंट फंड) खाता होता है। भारत में पीएफ खातों को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organisation - EPFO) की ओर से ऑपरेट किया जाता है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने एम्प्लॉई एनरोलमेंट स्कीम (Employees Enrolment Scheme) 2025 की शुरुआत की है। इस स्कीम का मकसद ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना है। इस स्कीम का मकसद उन कर्मचारियों को EPF कवरेज देना है जो किसी वजह से छूट गए थे। इसमें एम्प्लॉयर यानी काम कराने वाली संस्थानों को अपने छूट गए कर्मचारियों को एनरोल करने का मौका दिया जा रहा है।
इस स्कीम के तहत वे सभी कर्मचारी कवर होंगे जो 1 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच संस्था को जॉइन किए थे और अभी भी उस कंपनी के साथ काम कर रहे हैं। लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट मिनिस्ट्री ने EPFO के 73वें फाउंडेशन डे पर 1 नवंबर को ये स्कीम लॉन्च की है। वहीं केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मंसुख मांडविया ने EPFO की नई वेबसाइट www.epfo.gov.in भी लॉन्च की है। इसमें अब ज्यादा आसान इंटरफेस, बेहतर नेविगेशन और सभी सर्विस तक सरल पहुंच दी गई है।
यह स्कीम 1 नवंबर 2025 से 6 महीने तक यानी 30 अप्रैल 2026 तक चलेगी। इसका मकसद एंप्लॉयर्स (Employers) को इस बात के लिए प्रोत्साहित करना है कि वे उन कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के दायरे में लाएं, जो अब तक किसी कारण से रजिस्टर्ड नहीं हो सके थे। इस बारे में जानकारी देने वाले 10 अक्टूबर 2025 के आधिकारिक सर्कुलर में इसे कर्मचारी भविष्य निधि (संशोधन) स्कीम 2025 ( Employees’ Provident Funds (Amendment) Scheme, 2025) कहा गया है।
इस स्कीम (EPFO Scheme 2025) के तहत कोई भी कंपनी या संस्था (Establishment) एनरोलमेंट अभियान में शामिल हो सकती है, चाहे वह पहले से EPF के तहत कवर हो या नहीं। इस कैंपेन के तहत एंप्लॉयर ऐसे कर्मचारियों को रजिस्टर कर सकते हैं, जिन्होंने 1 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 (July 1, 2017 – October 31, 2025) के बीच उनके लिए काम करना शुरू किया हो और जो डिक्लेरेशन की तारीख (Date of Declaration) तक जीवित (Alive) और एंप्लॉएड (Employed) हों।
इन कर्मचारियों के लिए कंप्लायंस (Compliance) उसी महीने से शुरू माना जाएगा, जिस महीने से एंप्लॉयर उनके जुड़ने का डिक्लेरेशन देंगे। सरकार, ऐसी संस्थानों को एम्प्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड्स एंड मिसलेनियस प्रॉविजन्स एक्ट, 1952 के तहत उनकी पुरानी कंप्लायंस को रेगुलराइज करने का भी मौका दे रही है।
इस कैंपेन के तहत एनरोलमेंट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर किसी कर्मचारी का ईपीएफ कंट्रीब्यूशन पहले काटा नहीं गया है, तो उसका कर्मचारी कंट्रीब्यूशन (Employee Share) माफ कर दिया जाएगा। एंप्लॉयर को केवल एंप्लॉयर्स का हिस्सा (Employer’s Share), सेक्शन 7Q के तहत कैलकुलेट किया गया ब्याज (Interest - Sec 7Q), और एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज (Administrative Charges) देना होगा। इसके साथ ही इन सभी मामलों में केवल एक बार 100 रुपये की पेनाल्टी भरने पर इसे तीनों स्कीमों — ईपीएफ स्कीम 1952 (EPF Scheme 1952), ईडीएलआई स्कीम 1976 (Employees' Deposit Linked Insurance Scheme, 1976) और ईपीएस स्कीम 1995 (EPS Scheme 1995) - के तहत कंप्लायंस मान लिया जाएगा। इसके बाद तीनों स्कीम्स का पूरा फायदा मिलने लगेगा।
इस स्कीम में मैंडेटरी कंडीशन ये है कि एम्प्लॉयर्स को हर एम्प्लॉयी के लिए UMANG एप से फेस ऑथेंटिकेशन-बेस्ड UAN जेनरेट करना होगा और इलेक्ट्रॉनिक चालान (ECR - इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न) से कंट्रीब्यूशन जमा करना होगा।
इसके अलावा, लेबर मिनिस्टर ने ईपीएफओ का नया होमपेज भी लॉन्च किया, जिसका डोमेन नेम www.epfo.gov.in काफी यूजर-फ्रेंडली है। इसमें बेहतर इंटरफेस, आसान नेविगेशन और स्टेकहोल्डर्स के लिए की सर्विसेज और इंफो तक सिंपल एक्सेस मिलेगा।
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