
EV vs Hybrid Car: आज के जमाने में जब हम कार खरीदने की सोचते हैं, तो सिर्फ ये नहीं देखते कि कार कैसी दिखती है या कौन-सी ब्रांड है। असल में दिमाग में एक बड़ा सवाल होता है कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर इसका क्या असर होगा? साथ ही, हमें ध्यान रखना होता है कि हमारी गाड़ी पर्यावरण के लिए सही हो या नहीं।
नीति आयोग और सरकार ने साफ कर दिया है कि अब जो पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कारें (EV) होंगी, उन्हें ज्यादा रियायतें और सब्सिडी मिलेगी। मतलब, उनका दाम आम कारों से कम होने की पूरी संभावना है। ये गाड़ियां न सिर्फ आपकी जेब के लिए, बल्कि हमारे आसपास के साफ हवा के लिए भी अच्छी हैं। वहीं, हाइब्रिड कारों को ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा, भले ही वो पेट्रोल की बचत कर लें। आइए जानते हैं कौन सी कार लेने में फायदा है।
नीति आयोग और केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जीरो इमिशन यानी पूरी तरह इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर ही टैक्स छूट, सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन (इंसेंटिव) मिलेंगे। FAME-2 जैसी राष्ट्रीय योजनाओं के तहत बैटरी साइज के हिसाब से ही सब्सिडी दी जा रही है। दो पहिया पर 15,000 रुपये प्रति kWh, कारों पर 10,000 रुपये प्रति kWh तक लाभ मिल रहा है।राज्यों द्वारा भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मिलती है, जिससे ओवरऑल लागत कम आती है।EVs पर GST अब सिर्फ 5% है, जबकि पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड गाड़ियों पर यह दर 18-28% या उससे अधिक है।
सरकारी नीति में हाइब्रिड गाड़ियों को अतिरिक्त इंसेंटिव या सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। नीति आयोग के प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि हाइब्रिड को EV जैसा कोई सीधा लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह फ्यूल एफिशिएंसी में बेहतर हो। ऑटो इंडस्ट्री चाहती है कि हाइब्रिड को भी बढ़ावा दिया जाए, लेकिन सरकार का फोकस पूर्ण शून्य उत्सर्जन वाहनों पर है। हालांकि कुछ राज्यों जैसे दिल्ली और महाराष्ट्र ने सीमित दायरे में स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड्स पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन टैक में छूट दी है,लेकिन राष्ट्रीय नीति में कोई विशेष इंसेंटिव फिलहाल लागू नहीं है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें सरकारी प्रोत्साहनों के चलते तेजी से गिर रही हैं। EV बैटरियों की लागत घटने से गाड़ियां सस्ती हो रही हैं, साथ ही प्रयोग में आने वाली नई टेक्नोलॉजी ने टिकाऊपन और कारगर रेंज भी बढ़ाई है। दो और तीन पहिया EV, और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में तो कुल खर्च (Total Cost of Ownership) पेट्रोल/डीजल वाहनों से कहीं कम हो चुका है।
कई कैटेगिरी में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें अब हाइब्रिड कारों के बराबर या कम हो चुकी हैं, खासकर इलेक्ट्रिक स्कूटर, थ्री-व्हीलर और सार्वजनिक बसों में तो अंतर और ज्यादा है। निजी फोर-व्हीलर सेगमेंट में भी टाटा, महिंद्रा, MG जैसी कंपनियों के ईवी मॉडल अब पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड विकल्पों की तुलना में किफायती होने लगे हैं।
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