
नई दिल्ली: जैसे-जैसे डिजिटल इन्वेस्टिंग का मार्केट बढ़ रहा है, ध्यान ग्राहक जोड़ने के साथ-साथ विश्वसनीय, पारदर्शी और स्मार्ट इन्वेस्टमेंट प्लैटफॉर्म बनाने पर चला गया है। ऐसे में डिजिटल इन्वेस्टमेंट सेक्टर की एक कंपनी रुपीजी भी अलग-अलग स्तर के रणनीतिक निर्णयों को लागू करने में जुटा है। मिंट हिंदी ने रुपीजी के सीईओ शौर्यम गुप्ता से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रिटेल इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम में हो रहे बदलावों पर गहनता से चर्चा की और निवेशकों के लिए टिप्स भी मांगे। आइए जानते हैं रुपीजे के सीईओ ने क्या कहा।
रुपीजी सीईओ: यह बिल्कुल सच है। पिछले कुछ सालों में भारत में डीमैट अकाउंट्स की संख्या में ऐतिहासिक उछाल देखा गया है, जो कि देश के वित्तीय सशक्तीकरण के लिए बेहद शानदार संकेत है। लेकिन जब तकनीक के जरिए बाजार तक पहुंच आसान हो जाती है और वित्तीय साक्षरता पीछे छूट जाती है, तो नए निवेशकों के चोटिल होने का जोखिम बढ़ जाता है। मेरी नजर में ये चार सबसे बड़ी गलतियां हैं-
बहुत से नए इनवेस्टर्स को लगता है कि स्टॉक मार्केट कोई 'जल्दी अमीर बनने की स्कीम' है। वे निवेश करने और ट्रेडिंग करने के बीच का अंतर नहीं समझते। वे कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में पर्याप्त ज्ञान और अनुभव के बिना सीधे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या इंट्राडे ट्रेडिंग में उतर जाते हैं।
नए निवेशक अक्सर बाजार में इंस्टाग्राम, टेलीग्रीम, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर दूसरों के बड़े-बड़े प्रॉफिट स्क्रीनशॉट्स देखकर प्रवेश करते हैं। वे खुद रिसर्च करने के बजाय अनजान ग्रुप्स से मिली 'हॉट स्टॉक्स' टिप्स पर अपने मेहनत की कमाई लगा देते हैं।
FOMO के साथ-साथ लोग किसी स्पष्ट लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश नहीं करते हैं। अक्सर उनका एकमात्र लक्ष्य होता है जितना संभव हो उतना अधिक पैसा कमाओ। यह सोच बिना पूरी जानकारी के गलत जोखिम लेने की मानसिकता को जन्म देती है। ऐसी मानसिकता वाले लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं।
जब बाजार उनके खिलाफ जाता है, तो वे अपने नुकसान को स्वीकार करने के बजाय गिरते हुए स्टॉक में और पैसे लगाने लगते हैं। कई बार नए निवेशकों को लगता हैं कि अगर लगातार नुक्सान हो रहा हैं तो वो अगले ट्रेड में भरपाई कर लेंगे। हालांकि, उस समय संयम रखने की जरूरत होती है।
रुपीजी सीईओ: Rupeezy में हमारे लगभग पांच में से चार क्लाइंट्स बड़े महानगरों के बाहर से आते हैं, इसलिए यह हमारे लिए सिर्फ एक सेगमेंट नहीं है, बल्कि यही हमारा मुख्य आधार है। जब हम अपने डेटा को देखते हैं, तो टियर 2/3 और मेट्रो के निवेशकों के बीच चार प्रमुख अंतर साफ तौर पर उभरकर आते हैं।
हमारे टियर 2/3 क्लाइंट्स महानगरों के मुकाबले ज्यादा युवा हैं। इनमें से अधिकांश पहली पीढ़ी के निवेशक हैं, आधे से ज्यादा ने घोषणा की है कि उनके पास पहले का कोई ट्रेडिंग अनुभव नहीं है। वहीं, छोटे शहरों के निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता मेट्रो निवेशकों के बिल्कुल समान है। यह आम धारणा कि छोटे शहरों के निवेशक वित्तीय रूप से रूढ़िवादी या सतर्क हैं, पूरी तरह से गलत है। उनकी आकांक्षाओं ने उनकी क्षमता को पीछे छोड़ दिया है।
प्रश्न: F&O में रिटेल निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, लेकिन नुकसान की घटनाएं भी सामने आई हैं। एक ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म के रूप में आपकी जिम्मेदारी कहां तक है और निवेशकों को अनावश्यक जोखिम से बचाने के लिए आपने कौन-से व्यावहारिक सुरक्षा उपाय लागू किए हैं?
रुपीजी सीईओ: फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और उसमें होने वाला नुकसान आज भारतीय पूंजी बाजार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। SEBI के अध्ययन भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि F&O में व्यापार करने वाले 90% से अधिक व्यक्तिगत ट्रेडर्स को वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ता है।
एक जिम्मेदार ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म के रूप में हमारी भूमिका केवल ट्रेडिंग की सुविधा देना नहीं, बल्कि निवेशक की सुरक्षा और जागरूकता सुनिश्चित करना भी है। और हम इसे अपनी नैतिक और व्यावहारिक जिम्मेदारी मानते हैं। इसीलिए, हमने अपने प्लैटफॉर्म पर कई एक्टिव और पैसिव रिस्क मैनेजमेंट फीचर्स लागू किए हैं।
जब भी कोई यूजर F&0 सेगमेंट में ट्रेड करने के लिए लॉग इन करता है या पहला ऑर्डर प्लेस करता है, तो उसे बाजार के वास्तविक आंकड़ों ( 90% नुकसान का डेटा ) के साथ एक स्पष्ट रिफ्रेशर वॉर्निंग दिखाई देती है। इसे हमने केवल एक वैधानिक औपचारिकता न बनाकर एक ऐसा पॉप-अप बनाया है जिसे यूजर को समझकर स्वीकार करना होता है।
ट्रेडिंग के दौरान जब कोई निवेशक लगातार नुकसान में जाता है, तो वह अक्सर ओवर-ट्रेडिंग (Revenge Trading) करने लगता है। हमारे किल स्विच फीचर के जरिए यूजर अपने F&O सेगमेंट को अगले कुछ घंटों या पूरे दिन के लिए बंद कर सकता है। एक बार डिसएबल होने के बाद वह चाहकर भी उस दिन दोबारा F&O ऑर्डर नहीं डाल सकता, जिससे वह बड़े नुकसान से बच जाता है।
जब कोई यूजर ऐसा ऑर्डर डालता है जो उसके पोर्टफोलियो या मार्जिन के हिसाब से अत्यधिक जोखिम भरा है, जैसे आउट ऑफ मनी (OTM) ऑप्शंस खरीदना या बिना स्टॉप लॉस के ट्रेड करना, तो हमारा सिस्टम ऑटोमैटिक अलर्ट दिखाता है। यह अलर्ट उन्हें ट्रेड निष्पादित करने से पहले पुनर्विचार करने का मौका देता है।
हम हर यूजर के लिए F&O सेगमेंट तुरंत चालू नहीं करते। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, आईटीआर जैसे आय प्रमाण और ट्रेडिंग अनुभव की समीक्षा अनिवार्य है, ताकि बिना तैयारी और पर्याप्त वित्तीय बैकअप के नए रिटेल निवेशक सीधे डेरिवेटिव्स में न उतरें।
रुपीजी सीईओ: आज बाजार में समस्या जानकारी की कमी नहीं, बल्कि डेटा ओवरलोड की है। अधिकांश फिनटेक ऐप्स निवेशक को दर्जनों फाइनेंशियल रेशियो, इंडिकेटर्स और न्यूज फीड्स तो दिखा देते हैं, लेकिन यह नहीं समझाते कि इस डेटा का उनके पोर्टफोलियो पर क्या असर पड़ रहा है। Rupeezy का FinAl Suite केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा को एक्शनेबल इनसाइट्स में बदलकर बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।
पाइवेट रिसर्च और पूर्वाग्रह मुक्त विश्लेषण: FinAI उपयोगकर्ताओं को न केवल व्यक्तिगत शेयरों के बारे में, बल्कि बाजार और तकनीकी विश्लेषण पर भी इनसाइट्स देता है। एक AI होने के नाते इसमें किसी भी शेयर को लेकर किसी इंसान जैसी पसंद या नापसंद का पूर्वाग्रह नहीं होता।
पोर्टफोलियो कंसंट्रेशन अलर्ट: यदि आपका 40% से अधिक पैसा किसी एक ही सेक्टर में लगा है, तो यह आपको समय रहते री-बैलेंसिंग का सुझाव देता है।
अनावश्यक जोखिम से बचाव: F&O या हाई रिस्क ट्रेड लेते समय यह रियल-टाइम में अलर्ट दिखाकर भावुक या जल्दबाजी में लिए जाने वाले गलत निर्णयों पर रोक लगाता है।
रुपीजी सीईओ: यह भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग की एक सबसे बड़ी विडंबना है। नए निवेशक अक्सर बाजार के रिटर्न चेजर बन जाते हैं, वे म्यूचुअल फंड या स्टॉक की 1 साल या 3 साल की सबसे ऊपर दिखने वाली CAGR लिस्ट देखते हैं और उसमें पैसा लगा देते हैं। हमने Rupeezy पर निवेशकों को केवल 'अतीत के आंकड़ों' के मोहजाल से बाहर निकालने और एक संतुलित, जोखिम-नियंत्रित पोर्टफोलियो बनाने के लिए ये खास फीचर्स विकसित किए हैं।
अक्सर निवेशकों को लगता है कि उन्होंने 5 अलग-अलग एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के म्यूचुअल फंड खरीदकर अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर लिया है। हमारा Portfolio Overlap टूल दो या दो से अधिक फंड्स का वास्तविक समय में मिलान करता है। यह आपको तुरंत प्रतिशत में दिखाता है कि आपके फंड्स के बीच कितना डुप्लिकेशन है। इससे निवेशक एक ही शेयर में बार-बार अप्रत्यक्ष निवेश करने से बच जाते हैं।
आज जब बाजार में 1,500 से अधिक म्यूचुअल फंड स्कीम्स उपलब्ध हैं, तो एक आम निवेशक के लिए सही फंड चुनना अक्सर भ्रमित करने वाला होता है। अक्सर निवेशक केवल अतीत के रिटर्न देखकर फंड चुन लेते हैं, जो रिस्क मैनेजमेंट के लिहाज से सही तरीका नहीं है।
इसी चुनौती को आसान बनाने के लिए Rupeezy ने अपने म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म पर 'Smart Explore' फीचर पेश किया है। यह एक विश्लेषणात्मक और विज़ुअल टूल है जो निवेशकों को कई म्यूचुअल फंड्स के जोखिम और रिटर्न का एक ही नजर में त्वरित और सटीक तुलनात्मक विश्लेषण करने की सुविधा देता है।
Disclaimer: इस इंटरव्यू में दी गई राय एक्सपर्ट के हैं, मिंट हिंदी के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी जिम्मेदार नहीं है।
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