
Banking Services India: बैंक में खाता खुलवाने के लिए अब गांव से शहर जाने की मजबूरी काफी हद तक कम हो गई है। लेकिन सवाल यह है कि अगर बैंकिंग सुविधा आपके गांव या उसके आसपास मौजूद है, तो क्या हर काम के लिए बैंक की शाखा तक जाना जरूरी है? सरकार के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में बैंकिंग पहुंच लगभग सार्वभौमिक हो चुकी है। 99.92% आबाद गांवों में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध है।
यहां बैंकिंग आउटलेट का मतलब सिर्फ बैंक की पारंपरिक शाखा नहीं है। इसमें बैंक शाखा, बैंक मित्र और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक भी शामिल हैं। यानी बैंकिंग का नेटवर्क अब सिर्फ बड़ी इमारतों और शाखाओं तक सीमित नहीं रहा है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक जन धन दर्शक ऐप पर बैंकों की ओर से अपलोड किए गए आंकड़ों के आधार पर 6,01,328 आबाद गांवों में से 6,00,868 गांवों में 5 किलोमीटर के भीतर बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है। इस हिसाब से देश के 99.92% गांव बैंकिंग नेटवर्क के दायरे में आ चुके हैं। सिर्फ 460 गांव ऐसे बचे हैं, जहां इस तय दायरे में बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध नहीं है।
इस बदलाव को समझने के लिए एक बात साफ होना जरूरी है। सरकार के आंकड़ों में बैंकिंग सुविधा का मतलब सिर्फ शाखा नहीं है। ग्रामीण इलाकों में बैंक मित्र और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के केंद्र भी बैंकिंग सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। यही मॉडल उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है जहां बैंक की पूरी शाखा खोलना व्यावहारिक नहीं है।
17 जुलाई 2026 तक देश में 17.36 लाख से ज्यादा बैंक मित्र काम कर रहे थे। ये बैंकिंग सेवाओं को उन इलाकों तक पहुंचाने में मदद करते हैं जहां बैंक शाखाओं की संख्या कम है। इसका कारोबारी और आम ग्राहक के लिए सीधा मतलब यह है कि बैंकिंग सुविधा अब सिर्फ शाखा के काउंटर पर निर्भर नहीं है।
बैंकिंग नेटवर्क में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक भी बड़ा हिस्सा बन चुका है। 17 जुलाई 2026 तक इसके 1.65 लाख से ज्यादा केंद्र थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक 5.57 लाख गांवों और कस्बों में 11 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे रहा था। यानी डाक नेटवर्क अब सिर्फ चिट्ठी और पार्सल तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में भी इस्तेमाल हो रहा है।
पूरी तरह नहीं। 5 किलोमीटर के भीतर बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं है कि हर बैंकिंग काम बैंक मित्र या दूसरे आउटलेट पर ही हो जाएगा। कई सामान्य बैंकिंग जरूरतें स्थानीय बैंकिंग आउटलेट से पूरी की जा सकती हैं, लेकिन कुछ सेवाओं के लिए ग्राहक को अपनी बैंक शाखा, संबंधित बैंक के डिजिटल माध्यम या निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
17 जुलाई 2026 तक देश में 1.81 लाख से ज्यादा बैंक शाखाएं थीं। इसके साथ 17.36 लाख से अधिक बैंक मित्र और 1.65 लाख से ज्यादा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक केंद्र मौजूद थे। इस पूरे नेटवर्क का मकसद बैंकिंग सेवाओं को उन लोगों तक पहुंचाना है, जो अब तक औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से दूर रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य देश के हर आबाद गांव के 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध कराना है। जिन इलाकों में अभी सुविधा नहीं पहुंची है, वहां बैंकिंग आउटलेट खोलने की प्रक्रिया जारी है। RBI ने भी वाणिज्यिक बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को देश में कहीं भी शाखा खोलने की अनुमति दी है, बशर्ते उनकी कम से कम 25% शाखाएं बैंकिंग सुविधा से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में हों।
पहले बैंकिंग सुविधा का मतलब अक्सर नजदीकी शहर या कस्बे की बैंक शाखा तक जाना होता था। अब बैंक मित्र और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक जैसे माध्यमों के विस्तार से बैंकिंग सेवाएं गांवों के ज्यादा करीब आ गई हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा उन ग्राहकों को हो सकता है जिनके लिए बैंक शाखा तक पहुंचने में समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।
बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार के साथ जन धन योजना ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। 17 जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री जन धन योजना के 58.77 करोड़ खाते खुले थे और इनमें कुल ₹3,12,414 करोड़ जमा थे। इन खातों ने बड़ी संख्या में लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में मदद की है।
अब अगली चुनौती सिर्फ बैंक खाता खोलने की नहीं, बल्कि उसका नियमित इस्तेमाल बढ़ाने की है। बैंकिंग पहुंच का फायदा तभी पूरी तरह मिलेगा, जब ग्राहक बचत, पैसे भेजने, सरकारी लाभ पाने, बीमा, पेंशन और दूसरी वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल कर सकें। यानी सरकार के सामने अब “बैंकिंग पहुंच” के बाद “बैंकिंग इस्तेमाल” बढ़ाने की चुनौती भी है।
बैंकिंग सुविधा का विस्तार सिर्फ भौतिक नेटवर्क से नहीं हुआ है। मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान ने भी ग्राहक के बैंक जाने की जरूरत कम की है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल इंटरनेट, मोबाइल और डिजिटल साक्षरता पर निर्भर करता है। इसलिए ग्रामीण इलाकों में बैंक मित्र और दूसरे स्थानीय बैंकिंग आउटलेट अभी भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
99.92% कवरेज का आंकड़ा बड़ा है, लेकिन सरकार के अपने आंकड़ों के मुताबिक 460 आबाद गांव अभी भी 5 किलोमीटर के बैंकिंग आउटलेट दायरे से बाहर हैं। यानी लगभग पूरा लक्ष्य हासिल होने के बावजूद अंतिम छोर तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाना अभी बाकी है।
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