Fasal Bima Yojana 2025: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) 2025 को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि अब पट्टेदार (किरायेदार) किसान भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का फायदा उठा सकेंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें जमीन मालिक से मंजूरी लेनी होगा। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने के लिए भी अगर जमीन मालिक इजाजत देता है, तो पट्टेदार किसान की फसल राज्य सरकार की सहमति से MSP पर खरीदी जा सकती है। इस बात की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी है।
बता दें कि भारत सरकार ने ये योजना किसानों की मदद के लिए शुरू की है। अगर किसी किसान की फसल बारिश, तूफान, सूखा या कीड़ों की वजह से खराब हो जाती है, तो इस योजना के तहत सरकार से मुआवज़ा (compensation) मिल सकता है। इससे पहले, पट्टेदार किसान बहुत सारी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पाते थे। चौहान ने कहा कि अब इस स्थिति को बदला जा रहा है।
पट्टेदार किसानों के लिए उठाए गए कदम
लोकसभा में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पट्टेदार किसान सरकारी योजनाओं का पूरा फायदा नहीं ले पाते थे, क्योंकि ज्यादातर पट्टे मौखिक होते हैं और दस्तावेज की कमी के कारण वे फायदा नहीं ले पाते थे। मंत्री ने बताया कि इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने अहम कदम उठाए हैं। चौहान ने कहा कि अब एक पट्टेदार किसान या बंटाईदार भी एफपीओ का सदस्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में 6.5 लाख से अधिक पट्टेदार किसानों को पीएमएफबीवाई का लाभ मिला है, जबकि लगभग 42 लाख बंटाईदारों से एमएसपी पर फसल की खरीद की गई है।
जानिए कौन हैं पट्टेदार किसान
नीति आयोग और कई कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में लगभग 5 करोड़ किसान ऐसे हैं, जो खुद जमीन के मालिक नहीं हैं। लेकिन दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं। इन किसानों को ही पट्टेदार किसान कहा जाता है। इनमें बटाईदार, लीज पर जमीन लेने वाले और ठेके पर खेती करने वाले किसान शामिल होते हैं।
किसानों के 5,405 करोड़ रुपये के क्लेम बकाया
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियों पर 5,405 करोड़ रुपये के क्लेम बकाया हैं। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में दी। यह रकम 2024 की खरीफ फसल तक के कई सीजनों की है और कुल क्लेम का करीब 6 फीसदी हिस्सा है। सरकार ने क्लेम जल्दी देने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन इतनी बड़ी राशि अभी भी अटकी है। इस योजना में किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है, सिर्फ 1.5% से 2% तक, जो फसल के हिसाब से अलग-अलग होता है। बाकी प्रीमियम का आधा-आधा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दिया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र 90% प्रीमियम देता है।