FASTag Rules India: अगर आप रोजाना दिल्ली से नोएडा या गुरुग्राम जाते हैं, तो आपके लिए जितना जरूरी पेट्रोल है, अब उतना ही जरूरी फास्टैग बन गया है। हाल ही में फास्टैग को लेकर नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एनजीओ) ने दो पेज का दस्तावेज शेयर किया है। इसमें फास्ट टैग से जुड़ी हुई जानकारी दी गई है। ये दस्तावेज को हर गाड़ी चलाने को पढ़ने चाहिए। आइए जानते हैं क्या लिखा है उन दस्तावेजों में
फास्टैग से जुड़ा जरूरी नियम
फास्टैग के नियमों के अनुसार यदि वाहन पर फास्टैग नहीं लगा है या किसी कारणवश फास्टैग से भुगतान असफल हो जाता है, तो चालक से टोल शुल्क का दुगना नगद भुगतान लिया जा सकता है। वहीं यदि भुगतान यूपीआई के माध्यम से किया जाए, तो नियमानुसार केवल टोल राशि का 1.25 गुना ही देना होगा।
हालांकि काफी बार देखा गया है कि टोल वाले यूपीआई स्वीकार नहीं करते हैं। टोलकर्मी यूपीआई से भुगतान स्वीकार करने से मना कर देते हैं या दुगनी राशि लेकर नकद रसीद थमा देते हैं। इसलिए सभी वाहन चालकों से अनुरोध है कि वो इन दस्तावेजों को अपने पास जरूर रखें। अगर कोई टोलकर्मी नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे इन यूपीआई नियमों के बारे में बता सकें और अपने अधिकार के लिए लड़ सकें।
कहां करें टोलकर्मी की शिकायत?
अगर टोलकर्मी नियमों का पालन न करे या आपकी बात न सुने, तो आप सीधे NHAI की 24×7 हेल्पलाइन 1033 पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा भारत सरकार के CPGRAMS पोर्टल (pgportal.gov.in) या UMANG ऐप के जरिए भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत करते समय टोल प्लाजा का नाम, तारीख, समय और घटना का जिक्र जरूर करें।
कहां-कहां काम आता है फास्टैग?
फास्टैग का इस्तेमाल मुख्य रूप से टोल प्लाजा पर बिना रुके टैक्स चुकाने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके अलावा अब ये कई जगह काम आता है। मॉल, एयरपोर्ट और बड़े शहरों की पार्किंग में कैशलेस भुगतान के लिए, कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन का पैसा देने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अब ये सिर्फ टोल टैक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे रोजमर्रा की कई सेवाओं में यूज होने लगा है।