केंद्र सरकार ने वित्त विधेयक 2026 के जरिए टैक्स नियमों को और सख्त बनाने का संकेत दे दिया है। खास तौर पर ऑडिट से जुड़े मामलों में अब लापरवाही करना भारी पड़ सकता है। नए प्रस्ताव के तहत ऑडिट रिपोर्ट या अकाउंटेंट की रिपोर्ट समय पर दाखिल नहीं करने पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार ने डिस्क्रेशनरी पेनल्टी सिस्टम को हटाकर अब एक तय और “ग्रेडेड फीस” व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। ये नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे और टैक्स ईयर 2026-27 से असर दिखेगा। आइए जानते हैं पूरी खबर को विस्तार से।
देरी पर लगेगा 75 हजार का जुर्माना
वित्त विधेयक में प्रस्तावित सेक्शन 428 और सेक्शन 63 के तहत ऑडिट कंप्लायंस को सबसे ऊपर रखा गया है। अगर कोई टैक्सपेयर तय समय पर अपने खातों का ऑडिट नहीं करवाता या ऑडिट रिपोर्ट फाइल नहीं करता, तो उस पर कम से कम 75 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। खास बात यह है कि अगर देरी सिर्फ एक दिन की भी हुई, तब भी 75 हजार रुपये की फीस देनी होगी। वहीं, अगर यह चूक 30 दिन से ज्यादा चलती है, तो जुर्माना सीधे बढ़कर 1.50 लाख रुपये हो जाएगा। यानी अब “थोड़ी देर हो गई” जैसी कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।
अकाउंटेंट रिपोर्ट में देरी पर भारी जुर्माना
दूसरी ओर सेक्शन 172 के तहत अकाउंटेंट की रिपोर्ट समय पर जमा न करने पर भी सख्ती की गई है। अगर कोई टैक्सपेयर अकाउंटेंट रिपोर्ट फाइल नहीं करता, तो पहले महीने के लिए 50 हजार रुपये की फीस लगेगी। अगर देरी आगे भी जारी रहती है, तो यह रकम बढ़कर 1 लाख रुपये तक पहुंच जाएगी। सरकार का साफ संदेश है कि ऑडिट और प्रोफेशनल रिपोर्ट्स को हल्के में लेने की आदत अब छोड़नी होगी। यह नियम खास तौर पर उन कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को प्रभावित करेगा, जिनके लिए ऑडिट अनिवार्य होता है।
टैक्स कंप्लायंस में ढिलाई की जगह नहीं
हालांकि, आम टैक्सपेयर्स को कुछ राहत भी दी गई है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में देरी पर फीस को सीमित रखा गया है। जिनकी कुल आय 5 लाख रुपये तक है, उनके लिए यह फीस अधिकतम 1,000 रुपये होगी। वहीं, बाकी मामलों में अधिकतम 5,000 रुपये की फीस तय की गई है। सरकार का कहना है कि इस नए सिस्टम से टैक्सपेयर्स को साफ-साफ नियम समझ आएंगे। कुल मिलाकर, वित्त विधेयक 2026 यह साफ कर देता है कि अब टैक्स कंप्लायंस में ढिलाई की कोई जगह नहीं है।