Direct Tax Collections: देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक खबर सामने आई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 10 जुलाई तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 6,64,807 करोड़ रुपये पहुंच गया है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 6,44,375 करोड़ रुपये था। यानी प्रत्यक्ष कर संग्रह में 3.17% की बढ़त दर्ज की गई है।
नेट टैक्स में मामूली गिरावट
वहीं चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 10 जुलाई के बीच सरकार का नेट डायरेक्ट टैक्स संग्रह 5.63 लाख करोड़ रहा है। हालांकि यह एक बड़ी राशि है, लेकिन पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इसमें 1.34% की कमी दर्ज की गई है। इस गिरावट का मुख्य कारण टैक्स रिफंड्स में तेजी रहा, जो 38% की वृद्धि के साथ 1.02 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं।
ये बढ़ोतरी सरकार के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। डायरेक्ट टैक्स, यानी इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स जैसे कर सीधे करदाताओं से लिए जाते हैं। इन्हीं से सरकार को विकास योजनाओं के लिए जरूरी धन मिलता है।
देशवासियों ने भरा टैक्स
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, ये बढ़त टैक्स देने वालों की संख्या में इजाफा, बेहतर डिजिटल सिस्टम और टैक्स चोरी पर नकेल कसने के प्रयासों की वजह से आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश की कारोबारी गतिविधियां स्थिर हो रही हैं और लोग टैक्स देने को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं।
टैक्स सिस्टम में हुआ सुधार
सरकार को उम्मीद है कि वित्त वर्ष के आगे बढ़ने के साथ ये आंकड़ा और ऊंचा जाएगा, जिससे शिक्षा,स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे पर ज्यादा निवेश संभव होगा। प्रत्यक्ष कर संग्रह का यह रुझान न सिर्फ राजस्व में मजबूती की ओर इशारा करता है,बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय टैक्स सिस्टम में सुधार के प्रयास अपना असर दिखा रहे हैं।