
Stock Market vs FD returns: अक्सर लोग निवेश करने को लेकर काफी कंफ्यूज रहते हैं कि वो कहां निवेश करें। अगर आप भी एक ऐसी जगह निवेश करना चाहते हैं, जहां न सिर्फ आपका पैसा सुरक्षित रहे और आपको रिटर्न भी अच्छे मिलें तो ये आर्टिकल आपके लिए है। जब भी निवेश की बात होती है लोगों के दिमाग में स्टॉक मार्केट और फिक्स्ड डिपॉजिट का नाम सबसे पहले आता है।
मगर सही राय या नॉलेज न होने के कारण काफी बार लोग गलत फैसले ले लेते हैं। आमतौर पर लोगों के दिमाग में सबसे पहले एफडी का नाम सबसे पहले आता है। दरअसल, ये सेविंग करने का सबसे सेफ तरीका माना जाता है। इसके अलावा अधिकांश लोग स्टॉक मार्केट को रिस्की समझते हैं।
फिलहाल, अगर आप निवेश करने से पहले स्टॉक मार्केट और फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में और जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल में ये बताया जा रहा है कि आप अपने बजट और जरूरत के हिसाब से किसमें निवेश कर सकते हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक वित्तीय योजना है जिसे बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान प्रदान करते हैं। इसमें आप एक निश्चित राशि को तय समय के लिए जमा करते हैं और उस पर एक तय ब्याज दर मिलती है। इस अवधि के दौरान बैंक आपको ब्याज देता है या तो समय-समय पर या पूरी राशि मैच्योरिटी के समय।
एफडी सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न देने वाला ऑप्शन है, इसलिए यह उन लोगों के बीच लोकप्रिय है जो जोखिम नहीं लेना चाहते। एफडी पर ब्याज दरें आमतौर पर सेविंग अकाउंट से अधिक होती हैं, लेकिन शेयर बाजार से कम।
शेयर बाजार एक ऐसा स्थान है जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं।
निवेशक शेयर खरीदते हैं ताकि उन्हें शेयर की कीमत बढ़ने या कंपनी से मिलने वाले डिविडेंड से मुनाफा हो सके। शेयर बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं, जो कंपनी के प्रदर्शन, अर्थव्यवस्था और निवेशकों की भावना पर निर्भर करती हैं।
1. रिटर्न: शेयर बाजार से एफडी की तुलना में अधिक मुनाफा मिल सकता है। एफडी पर ब्याज तय होता है, जबकि शेयरों में कंपनी के अच्छा प्रदर्शन करने पर बड़ा लाभ हो सकता है। लेकिन इसमें नुकसान का खतरा भी रहता है, अगर शेयर की कीमत गिर जाए तो।
2. जोखिम: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, इसलिए यह जोखिम भरा होता है। वहीं एफडी कम जोखिम वाला विकल्प है क्योंकि इसमें गारंटीड रिटर्न और मूलधन की सुरक्षा होती है।
3. लिक्विडिटी: शेयर बाजार में आप किसी भी समय शेयर खरीद या बेच सकते हैं, इसलिए यह ज़्यादा लिक्विड है। एफडी में पैसा निश्चित समय के लिए लॉक रहता है। अगर आप बीच में पैसा निकालते हैं, तो बैंक जुर्माना लगा सकता है।
4. टैक्स: एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना पड़ता है। जबकि शेयरों में लंबे समय के बाद हुए मुनाफे पर टैक्स की दर कम होती है।
5. निवेश अवधि: लंबे समय के लिए शेयर बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन छोटे या मध्यम समय के लक्ष्यों के लिए एफडी ज्यादा सुरक्षित और स्थिर विकल्प है।
एफडी में जोखिम: एफडी सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक है क्योंकि इसमें गारंटीड रिटर्न मिलता है। आपको पहले से पता होता है कि तय समय के बाद आपको कितना मिलेगा। इसका एकमात्र जोखिम ब्याज दर का होता है यानी अगर महंगाई ज्यादा हो गई तो असली कमाई घट सकती है।
शेयर बाजार में जोखिम: शेयरों में जोखिम ज्यादा होता है क्योंकि उनकी कीमतें बाजार की स्थिति, अर्थव्यवस्था और कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करती हैं। बाजार में गिरावट आने पर निवेश का कुछ हिस्सा या पूरा पैसा भी डूब सकता है, खासकर अगर निवेश कम समय के लिए किया गया हो।
एफडी ज़्यादा सुरक्षित है क्योंकि इसमें तय रिटर्न और मूलधन की गारंटी होती है। वहीं शेयर जोखिम भरे होते हैं, लेकिन अगर निवेश सही ढंग से और लंबे समय के लिए किया जाए तो ज्यादा मुनाफा दे सकते हैं। चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और आपका निवेश लक्ष्य क्या है।
एफडी की लिक्विडिटी: एफडी में पैसा एक निश्चित अवधि के लिए लॉक होता है। अगर आपको बीच में पैसे की जरूरत पड़ती है और आप एफडी तोड़ते हैं, तो ब्याज में कटौती या जुर्माना लग सकता है। इसलिए यह कम फ्लेक्सिबल विकल्प है।
शेयरों की लिक्विडिटी: शेयर कभी भी बाजार के खुले समय में खरीदे या बेचे जा सकते हैं। इससे निवेशक जल्दी पैसा निकाल सकते हैं या बाजार के बदलावों का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन अगर बाजार गिरा हुआ है और आप उस समय बेचते हैं, तो नुकसान हो सकता है।
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