Flight Ticket Refund Rules: हवाई यात्रा के दौरान टिकट कैंसिल करना और रिफंड पाना हमेशा से यात्रियों के लिए परेशानी रहा है। कभी एयरलाइंस रिफंड के नाम पर बहुत कम पैसे वापस करती थीं, तो कभी वाउचर थमा देती थीं। यात्रियों की इन्हीं शिकायतों को दूर करने के लिए भारत के विमानन नियामक DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने एयरलाइन टिकट नियमों में बदलाव किए हैं किया है। कल 26 मार्च से लागू होने वाले ये नियम यात्रियों को काफी राहत देने वाले हैं।
कैंसिलेशन फी की जानकारी
अक्सर देखा जाता था कि टिकट कैंसिल करने पर एयरलाइंस इतने पैसे काट लेती थीं कि रिफंड के नाम पर कुछ बचता ही नहीं था। अब DGCA ने इस पर लगाम लगा दी है। नए नियम के मुताबिक, किसी भी स्थिति में एयरलाइन या उसका एजेंट आपसे 'बेसिक फेयर + फ्यूल सरचार्ज' से ज्यादा कैंसिलेशन फीस नहीं वसूल सकता। बुकिंग के समय ही एयरलाइन को कैंसिलेशन चार्जेस के बारे में साफ-साफ बताना होगा। साथ ही रिफंड का ब्रेकडाउन (कितना पैसा वापस मिल रहा है और कितना कटा) टिकट या वेबसाइट पर साफ दिखाना अनिवार्य होगा।
रिफंड प्रोसेस पर नो एक्स्ट्रा चार्ज
कई बार एयरलाइंस रिफंड को प्रोसेस करने के लिए अलग से सर्विस चार्ज या प्रोसेसिंग फीस मांगती थीं। अब यह पूरी तरह बंद होगा। 26 मार्च से लागू नियम के अनुसार रिफंड प्रोसेस करने के लिए एयरलाइन कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा सकती। भारत से या भारत को उड़ान भरने वाली विदेशी एयरलाइंस अपने देश के नियमों के हिसाब से रिफंड तो करेंगी, लेकिन पैसे वापस करने का तरीका (जैसे बैंक अकाउंट या क्रेडिट कार्ड में पैसा डालना) DGCA के नियमों के अनुसार ही होगा।
नाम सुधार पर कोई शुल्क नहीं
अगर आपने टिकट बुक करते समय नाम में कोई छोटी गलती कर दी है, तो अब घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आप 24 घंटे के अंदर यह गलती बता देते हैं और टिकट सीधे एयरलाइन की वेबसाइट से बुक किया गया है, तो नाम सुधार के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह नियम खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो छोटी टाइपिंग गलती के कारण पहले अतिरिक्त पैसे देने को मजबूर हो जाते थे।
मेडिकल इमरजेंसी में टिकट कैंसिलेशन
अगर अचानक तबीयत बिगड़ जाए या घर में कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो यात्री का काफी नुकसान हो जाता था। अब DGCA ने इसके लिए विशेष प्रावधान किए हैं। यदि यात्री या उसके साथ एक ही PNR पर यात्रा करने वाला परिवार का सदस्य यात्रा के दौरान अस्पताल में भर्ती हो जाता है, तो एयरलाइन को या तो पूरा रिफंड देना होगा या एक साल के लिए 'ट्रांसफरेबल क्रेडिट शेल' (वाउचर) देना होगा। अन्य मामलों में रिफंड तब मिलेगा, जब एयरलाइन या DGCA के पैनल से जुड़े मेडिकल विशेषज्ञ यह प्रमाणित कर देंगे कि यात्री यात्रा करने के लिए फिट है या नहीं।
क्यों जरूरी थे ये बदलाव
दरअसल, पिछले कुछ समय से यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत रिफंड में देरी, अधूरा पैसा मिलने और जबरन वाउचर देने को लेकर थी। इसी को देखते हुए DGCA ने यह सख्त नियम लागू किए हैं।अब एयरलाइंस को हर चीज साफ-साफ बतानी होगी, चाहे वह कैंसलेशन चार्ज हो या रिफंड की राशि। इससे यात्रियों को पहले से ही पूरी जानकारी मिल जाएगी और बाद में कोई भ्रम नहीं रहेगा।