फ्रीलांसिंग लोगों को अपनी पसंद के मुताबिक काम करने और कमाई करने की आजादी देती है। हालांकि, इसके साथ टैक्स से जुड़ी कुछ जिम्मेदारियां भी आती हैं। नौकरीपेशा लोगों को आमतौर पर सैलरी से होने वाली कमाई के लिए Form 16 मिलता है, लेकिन फ्रीलांसरों को आमतौर पर Form 16 नहीं मिलता, क्योंकि उनकी कमाई को सैलरी इनकम नहीं माना जाता है।
लेखन, डिजाइनिंग, कंसल्टिंग, ट्यूशन, कंटेंट क्रिएशन, डिलीवरी वर्क और दूसरी फ्रीलांस सेवाओं से होने वाली कमाई को आमतौर पर बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय माना जाता है। इसलिए फ्रीलांसरों के लिए यह समझना जरूरी है कि ITR दाखिल करते समय अपनी कमाई की जानकारी किस तरह देनी है।
31 अगस्त से पहले सही ITR फॉर्म, टैक्स के नियम, भुगतान की तारीख और रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख की जानकारी रखना जरूरी है। इससे गलतियां और पेनल्टी से बचने में मदद मिल सकती है।
फ्रीलांसिंग के लिए कौन सा ITR फॉर्म?
ITR-4 उन व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) और पात्र फर्मों के लिए है, जिनकी कमाई बिजनेस या फ्रीलांस काम से होती है और जो अनुमानित कराधान योजना यानी Presumptive Taxation Scheme का विकल्प चुनना चाहते हैं। अगर आपकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और आपकी कमाई ऐसे बिजनेस या प्रोफेशन से होती है, जो अनुमानित कराधान के नियमों के तहत आता है, तो आप ITR-4 का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह फॉर्म LLP के लिए उपलब्ध नहीं है।
फ्रीलांस से होने वाली कमाई को ITR में आमतौर पर व्यवसाय या पेशे के लाभ और प्राप्तियां (Profits and Gains of Business or Profession) के तहत दिखाया जाता है। रिटर्न भरने से पहले फ्रीलांसरों को अपनी कमाई से जुड़े सभी रिकॉर्ड अच्छी तरह जांच लेने चाहिए।
इसके लिए जारी किए गए सभी इनवॉइस और मिले हुए भुगतान का रिकॉर्ड मिलाना चाहिए। बैंक स्टेटमेंट भी चेक करें, ताकि यह पता चल सके कि साल के दौरान कितनी रकम प्राप्त हुई है।
इसके अलावा Form 26AS और वार्षिक सूचना विवरण (Annual Information Statement) में दी गई जानकारी से भी अपनी आय और टैक्स से जुड़ी डिटेल मिलानी चाहिए।
फ्रीलांसरों को अपने TDS सर्टिफिकेट भी जांचने चाहिए, ताकि पहले से काटे गए टैक्स की सही जानकारी मिल सके। अगर वे बही-खाते या दूसरे अकाउंटिंग रिकॉर्ड रखते हैं, तो उन्हें भी ITR जमा करने से पहले जरूर जांचना चाहिए। सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से टैक्स रिटर्न भरना आसान होता है और गलतियों की संभावना भी कम रहती है।