
Government e Marketplace: कारोबार बढ़ाने के लिए ग्राहक सिर्फ खुले बाजार में ही तलाशना जरूरी नहीं है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी आपके कारोबार की बड़ी ग्राहक बन सकती हैं। सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM ने छोटे कारोबारियों के लिए इस बाजार तक पहुंच आसान बनाई है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 30 जुलाई 2026 तक GeM पर 11,75,001 MSME विक्रेता और सेवा प्रदाता पंजीकृत थे। वित्त वर्ष 2025-26 में इन MSME से GeM के जरिए करीब ₹2.37 लाख करोड़ की खरीद हुई।
GeM यानी Government e-Marketplace सरकार का ऑनलाइन खरीद प्लेटफॉर्म है। इसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत 2016 में शुरू किया गया था। इस प्लेटफॉर्म के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और दूसरी पात्र सरकारी संस्थाएं अपनी जरूरत के सामान और सेवाओं की खरीद करती हैं। दूसरी तरफ कारोबारी और सेवा प्रदाता यहां विक्रेता के तौर पर पंजीकरण कर सरकारी खरीदारों तक पहुंच सकते हैं।
आसान शब्दों में कहें तो यह सरकारी खरीद का ऑनलाइन बाजार है, जहां एक तरफ सरकारी खरीदार हैं और दूसरी तरफ सामान तथा सेवाएं बेचने वाले कारोबारी हैं। ऐसे में सरकार को आसानी से अपना सामान बेचकर मोटी कमाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको बाजार में भटकने की जरूरत नहीं है।
GeM पर छोटे कारोबारियों की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। MSME मंत्रालय की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक 30 जुलाई 2026 तक 11,75,001 MSME विक्रेता और सेवा प्रदाता GeM पर पंजीकृत थे। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी खरीद में छोटे कारोबारियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए GeM एक बड़ा डिजिटल माध्यम बन चुका है।
सिर्फ विक्रेताओं की संख्या ही बड़ी नहीं है, GeM के जरिए MSME को मिलने वाले कारोबार का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में MSME से GeM के जरिए करीब ₹2.37 लाख करोड़ की खरीद की गई। यानी छोटे कारोबारियों के लिए GeM सिर्फ उत्पाद सूचीबद्ध करने का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि सरकारी खरीद के बड़े बाजार तक पहुंचने का माध्यम भी बन रहा है।
सरकारी खरीद में सूक्ष्म और लघु उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति (Public Procurement Policy for Micro and Small Enterprises) भी महत्वपूर्ण है। नीति के तहत केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को वस्तुओं और सेवाओं की अपनी कुल सालाना खरीद का कम से कम 25% हिस्सा सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से 4% और महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से 3% खरीद का उप-लक्ष्य भी शामिल है।
GeM सिर्फ सामान बेचने तक सीमित नहीं है। इस प्लेटफॉर्म पर उत्पाद के साथ सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कारोबारी अपनी पात्रता और GeM पर उपलब्ध श्रेणियों के आधार पर उत्पाद या सेवाएं सूचीबद्ध कर सकते हैं। इसके बाद सरकारी खरीदार निर्धारित खरीद प्रक्रिया के तहत उनसे खरीद कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि अवसर सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग करने वाले कारोबारियों के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह की सेवाएं देने वाले उद्यमों के लिए भी उपलब्ध है।
छोटे कारोबार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक नए और बड़े ग्राहक तक पहुंचना है। GeM इस समस्या का एक विकल्प देता है। कारोबारी को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में जाकर अपना सामान दिखाने के बजाय एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी खरीदारों तक पहुंच मिल सकती है। यही वजह है कि GeM को सरकार ने सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता बढ़ाने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है।
नए और छोटे कारोबारियों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण बात यह है कि GeM पर विक्रेता के रूप में रजिस्ट्रेशन फ्री है। GeM के मुताबिक खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन का कोई शुल्क नहीं है। हालांकि ऑर्डर मिलने के बाद लागू नियमों के तहत कुछ लेनदेन पर शुल्क हो सकता है। इससे किसी छोटे कारोबारी के लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन के स्तर पर अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं पड़ता।
कारोबारी को सबसे पहले GeM पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण करना होता है। इसके बाद कारोबारी प्रोफाइल और जरूरी जानकारी पूरी करके पात्र उत्पाद या सेवाओं को प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया जा सकता है। इसके बाद सरकारी खरीद की जरूरत के आधार पर ऑर्डर, बोली या दूसरी निर्धारित खरीद प्रक्रिया के जरिए कारोबार का मौका मिल सकता है। हालांकि सिर्फ GeM पर रजिस्ट्रेशन कर लेने से सरकारी ऑर्डर मिलने की गारंटी नहीं होती। कारोबारी को संबंधित श्रेणी की पात्रता, उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत और खरीद प्रक्रिया की शर्तों को पूरा करना होता है।
GeM का पूरा सरकारी खरीद कारोबार MSME तक सीमित नहीं है। प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी खरीद का कुल मूल्य पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। GeM ने अपनी स्थापना के बाद से सरकारी खरीदारों, विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर सार्वजनिक खरीद को ऑनलाइन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे कारोबारियों के लिए इसका कारोबारी मतलब यह है कि वे ऐसे बाजार में प्रवेश कर सकते हैं जहां खरीदार निजी कंपनी या आम ग्राहक नहीं, बल्कि सरकारी संस्थाएं हैं।
GeM पर महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए Womaniya पहल भी चलाई जा रही है। इसका मकसद महिला उद्यमियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को सरकारी खरीदारों तक अपने उत्पाद पहुंचाने का अवसर देना है। इसके अलावा सार्वजनिक खरीद नीति में महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से 3% खरीद का उप-लक्ष्य पहले से तय है।
GeM के आंकड़े छोटे कारोबारियों के लिए सरकारी खरीद के आकार को दिखाते हैं। 11.75 लाख से ज्यादा MSME विक्रेता और सेवा प्रदाता प्लेटफॉर्म पर पहुंच चुके हैं और एक वित्त वर्ष में MSME से खरीद करीब ₹2.37 लाख करोड़ रही है। यानी अगर कोई कारोबारी ऐसा उत्पाद बनाता है या ऐसी सेवा देता है जिसकी जरूरत सरकारी विभागों और संस्थाओं को पड़ती है, तो GeM उसके लिए कारोबार का एक अतिरिक्त बाजार बन सकता है।
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