गांधीनगर में स्थित गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) भारत का पहला ग्लोबल फाइनेंशियल और टेक्नोलॉजी हब है। साल 2015 में स्थापित यह शहर 886 एकड़ में फैला है। इसका मुख्य उद्देश्य दुबई और सिंगापुर की तर्ज पर निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं देना है। यह विदेशी कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित करता है और भारतीय निवेशकों के लिए ग्लोबल मार्केट के दरवाजे खोलता है।
एक ही जगह सारी मंजूरियां, बिजनेस करना भी आसान
गिफ्ट सिटी की सबसे बड़ी खूबी इसका रेगुलेटरी सिस्टम है। यहां बिजनेस शुरू करने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। IFSC अथॉरिटी अकेली ऐसी संस्था है जो बैंकिंग, इंश्योरेंस और मार्केट से जुड़ी सारी मंजूरियां देती है। यह संस्था आरबीआई (RBI), सेबी (SEBI) और इर्डा (IRDAI) जैसे बड़े रेगुलेटर्स की संयुक्त भूमिका निभाती है।
निवेशकों और कंपनियों के लिए टैक्स की भारी बचत और खास छूट
गिफ्ट सिटी में बिजनेस और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई राजकोषीय लाभ दे रही है। यहां कंपनियों को टैक्स हॉलिडे की सुविधा मिलती है। इसके अलावा जीएसटी (GST), सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स जैसी कई कटौतियों से छूट दी गई है। इन फायदों की वजह से यहां लागत कम आती है और मुनाफा बढ़ता है।
NRIs के लिए ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाने का सुनहरा मौका
अनिवासी भारतीय यानी एनआरआई अब गिफ्ट सिटी के जरिए अपना ग्लोबल वेल्थ पोर्टफोलियो तैयार कर सकते हैं। वे यहां विदेशी मुद्रा में बचत खाते खोल सकते हैं। इस पैसे का उपयोग वे दुनिया भर के शेयर, रियल एस्टेट, डेट और प्राइवेट इक्विटी में निवेश करने के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा उन्हें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) जैसे एडवांस निवेश विकल्प भी मिलते हैं।
साल 2025 में हुए बड़े बदलाव और नई निवेश सुविधाएं
साल 2025 में गिफ्ट सिटी में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। अब भारतीय निवासी भी यहां विदेशी मुद्रा खाता खोल सकते हैं। फंड मैनेजमेंट के नियमों को आसान बनाया गया है, जिससे विदेशी फंड मैनेजर बिना ऑफिस खोले भी यहां अपना फंड लॉन्च कर सकते हैं। इसके अलावा इनकम टैक्स की छुट्टियों को बढ़ाकर 31 मार्च, 2030 तक कर दिया गया है।
कैसे काम करते हैं गिफ्ट सिटी फंड और क्या हैं चुनौतियां?
गिफ्ट सिटी के फंड काफी हद तक म्यूचुअल फंड की तरह ही काम करते हैं। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि फंड खुद अपने मुनाफे पर टैक्स चुकाता है। इससे निवेशकों को व्यक्तिगत तौर पर विदेशी लेनदेन का हिसाब रखने या हर साल टैक्स फाइलिंग की माथापच्ची नहीं करनी पड़ती। हालांकि, कुछ चुनौतियां अब भी हैं। जैसे एक साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा बाहर भेजने पर 20% टीसीएस लगता है। साथ ही, निवेश शुरू करने के लिए कम से कम 5,000 डॉलर की जरूरत होती है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।