
हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनकी संपत्ति सही हाथों में जाए और बच्चों को कोई कानूनी परेशानी न हो। अगर आप भी अपना रेजिडेंशियल फ्लैट अपनी बेटी को देना चाहते हैं, तो आपके पास कई कानूनी रास्ते मौजूद हैं। अक्सर लोग इस उलझन में रहते हैं कि गिफ्ट डीड बेहतर है या वसीयत तैयार करना। गोलटेलर के फाउंडर विवेक बांका के अनुसार, इन दोनों ही विकल्पों के अपने नफे-नुकसान हैं।
अपनी बेटी को प्रॉपर्टी देने का सबसे सीधा और पॉपुलर तरीका गिफ्ट डीड है। यह आपके जीवनकाल में ही प्रॉपर्टी ट्रांसफर की सुविधा देता है। इससे मालिकाना हक एकदम साफ हो जाता है और भविष्य में किसी तरह का भ्रम नहीं रहता है।
इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, अगर कोई पिता अपनी बेटी को संपत्ति गिफ्ट करता है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। हालांकि, यहां एक पेच है। अगर बेटी भविष्य में उस फ्लैट को बेचती है, तो उसे कैपिटल गेन यानी पूंजीगत लाभ पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है।
प्रॉपर्टी ट्रांसफर करना एक भावुक और संवेदनशील फैसला होता है। जानकारों का कहना है कि मालिक को अपनी वित्तीय सुरक्षा का ख्याल जरूर रखना चाहिए। इमोशन में आकर सब कुछ देने के बजाय, अपने नाम पर पर्याप्त पैसा और संपत्ति बचाकर रखनी चाहिए ताकि बुढ़ापे में कोई दिक्कत न आए।
अगर आप चाहते हैं कि जब तक आप जीवित हैं, तब तक प्रॉपर्टी पर आपका पूरा कंट्रोल रहे, तो 'वसीयत' यानी 'Will' सबसे अच्छा विकल्प है। एक सही तरीके से लिखी गई और रजिस्टर्ड वसीयत उत्तराधिकार की प्रक्रिया को बहुत आसान बना देती है। इससे आगे चलकर परिवार में झगड़े या कानूनी उलझनें पैदा होने का डर नहीं रहता है। पिता की मृत्यु के बाद संतान को सोसायटी में नाम ट्रांसफर कराने में थोड़ी कागजी कार्यवाही करनी पड़ सकती है। अगर वसीयत साफ तरीके से नहीं लिखी गई हो और रजिस्टर्ड न हो तो आगे चलकर विवाद भी हो सकते हैं।
जबकि दूसरी तरफ गिफ्ट डीड से मौत के बाद होने वाली कागजी कार्यवाही, प्रक्रिया में देरी और टाइटल ट्रांसफर का झंझट बच जाता है चूंकि ट्रांसफर पिता के जीवित रहते हो जाता है, इसलिए इसे करना आमतौर पर बहुत आसान होता है। मौत के बाद होने वाले झगड़ों या देरी का खतरा भी कम हो जाता है।
प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए 'प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट' जैसा विकल्प भी मौजूद है। लेकिन यह आमतौर पर उन परिवारों के लिए होता है जिनके पास बहुत ज्यादा संपत्ति है। सिर्फ एक फ्लैट के ट्रांसफर के लिए यह तरीका व्यावहारिक नहीं माना जाता है।
कुल मिलाकर कहें तो अगर आप और आपकी बेटी अभी ही मालिकाना हक बदलने को लेकर सहज हैं, तो गिफ्ट डीड बेस्ट है। लेकिन अगर आप अपनी मृत्यु तक प्रॉपर्टी पर नियंत्रण चाहते हैं, तो वसीयत बनाने में समझदारी है।
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