Income Tax on Gold: अगर आप किसी मुसीबत में हैं और अपने पुश्तैनी गहने बेचने जा रहे हैं, तो उनको बेचने से पहले इनकम टैक्स के नियम के बारे में जान लीजिए। दरअसल पुश्तैनी गहनों को बेचने के बाद मिलने वाली रकम पर आपको इमकम टैक्स देना होगा। हालांकि पुश्तैनी गहनों पर लगने वाला टैक्स आम गहनों की अपेक्षा काफी अलग होता है।आइए जानते हैं कि पुराने यानी दादी-नानी के जमाने के गहनों को बेचने पर टैक्स की गणना कैसे होती है।आयकर विभाग के नियम के अनुसार, किसी कैपिटल एसेट के ट्रांसफर होने वाला फायदा कैपिटल गेन के तहत टैक्स के दायरे में आता है।
क्या पूरी कीमत पर देना होगा टैक्स?
अगर आप पुश्तैनी गहना बेच रहे हैं, तो आपको उसे बेचने पर मिलने वाली पूरी रकम पर टैक्स नहीं देना होता है। अगर आपने गहना 10 लाख रुपये में बेचा है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि आपको पूरे 10 लाख रुपये पर टैक्स देना होगा। टैक्स पूरी कीमत पर नहीं बल्कि कैपिटल गेन पर लगता है।आसान शब्दों में कहें, तो मान लीजिए आपके परिवार ने सोना 3 लाख रुपये में खरीदा था और फिर उन्होंने वो आपको विरासत में दे दिया। अब आपने उसे 10 लाख रुपये में बेच दिया। ऐसी स्थिति में टैक्स मुनाफे वाले 7 लाख पर लगेगा।
कैसे पता चलेगा कि कितने का था सोना?
अगर आपकी दादी ने सोना 1980 में खरीदा था, लेकिन आपके पास उसका बिल नहीं है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में आयकर विभाग 1 अप्रैल 2001 का कट-ऑफ रूल अपनाता है। अगर सोना 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदा गया था, तो आपके पास एक शानदार विकल्प होता है।
आप या तो पूर्वज की असल खरीद कीमत चुन सकते हैं, या 1 अप्रैल 2001 को सोने का जो बाजार भाव (Fair Market Value - FMV) था, उसे अपनी लागत मान सकते हैं। जाहिर है, 2001 का भाव 1980 या 1990 के भाव से कहीं ज्यादा होगा, जिससे आपकी लागत कागजों में बढ़ जाएगी और आपका टैक्स वाला मुनाफा कम हो जाएगा।
गहने बेचने के बाद भी जीरो टैक्स करने का तरीका
अगर आप सोना बेचकर मिलने वाली पूरी बिक्री राशि (Net Sale Consideration) का इस्तेमाल कोई नया रिहायशी मकान (Residential House) खरीदने या बनाने में करते हैं, तो आपको कैपिटल गेन टैक्स से पूरी छूट मिल सकती है। ध्यान रहे कि नया घर सोना बेचने के 1 साल पहले या 2 साल के भीतर खरीदा जाना चाहिए।