
गोल्ड लोन एक बार में मिलने वाला लोन होता है। इसमें आप अपने सोने के गहने या सिक्के गिरवी रखते हैं। बैंक या लेंडर आपके सोने की कीमत तय करता है, उतनी राशि मंजूर करता है और वह पैसे आपके बैंक खाते में भेज देता है।
इसके बाद आप उस रकम को हर महीने तय EM में एक निश्चित समय तक चुकाते हैं। जब पूरा लोन चुक जाता है, तो आपका सोना आपको वापस मिल जाता है। यह किसी आम EMI लोन की तरह होता है जिसमें तय राशि, तय समय और अंत में सोना वापस पाने की निश्चितता होती है।
गोल्ड ओवरड्राफ्ट में आपका सोना एक रिवॉल्विंग क्रेडिट लाइन बन जाता है। यानी बैंक आपको एक लिमिट देता है, जैसे ₹3 लाख तक। आप उस लिमिट में से ज़रूरत के हिसाब से पैसे निकाल सकते हैं, वापस कर सकते हैं और दोबारा निकाल सकते हैं। इसमें ब्याज सिर्फ उतनी राशि पर और उतने दिनों के लिए लगता है जितना और जितने समय के लिए आपने पैसा इस्तेमाल किया। इसे आप ऐसे समझें जैसे क्रेडिट कार्ड, लेकिन कार्ड के बिना।
दोनों ही प्रोडक्ट्स में कुछ फीस लग सकती हैं जैसे प्रोसेसिंग फीस, वैल्यूएशन चार्ज, रिन्युअल फीस (ओवरड्राफ्ट के लिए) और लेट पेमेंट पर पेनल इंटरेस्ट। LTV (Loan to Value) यानी आपके सोने की कीमत के मुकाबले मिलने वाली लोन राशि यह सीमित होती है। अगर सोने की कीमत घटती है, तो बैंक आपसे अतिरिक्त सोना या पैसा जमा करने को कह सकता है। हमेशा यह जांच लें कि लोन प्री-पेमेंट, क्लोजर या डिफॉल्ट की स्थिति में आपके सोने का क्या होगा।
एक उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आपको अगले 6 महीनों में जरूरत पड़ सकती है कुल ₹3 लाख तक की, लेकिन एक बार में नहीं। पहले 2 हफ्तों के लिए ₹1 लाख, फिर एक महीने कुछ नहीं, और उसके बाद 10 दिनों के लिए ₹50,000। तो गोल्ड ओवरड्राफ्ट में आप सिर्फ उतनी रकम निकालेंगे जितनी जरूरत है, और सिर्फ उन्हीं दिनों का ब्याज देंगे। लेकिन अगर आपको अभी ₹3 लाख चाहिए घर की मरम्मत के लिए और आप इसे सालभर में चुकाना चाहते हैं, तो गोल्ड लोन सही रहेगा।
आपका सोना एक ताकत है एक जमानत जो आपको पैसा दिला सकती है। अब बस यह सोचें कि आपकी जरूरत कैसी है:
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