Gold Loan vs Personal Loan: जब गोल्ड की बात आती है, तो हम जानते हैं कि सदियों से हमारी संस्कृति और परंपराओं में इसकी कितनी अहम भूमिका रही है। वहीं पिछले कुछ सालों से इसकी कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण लोग इसमें निवेश करना भी पसंद करते हैं। इसकी वजह ये है कि सोने में निवेश समय के साथ भरोसेमंद रिटर्न देता है। आजकल वैसे भी गोल्ड लोन (Gold Loan) फेमस कोलेट्रल लोन के ऑप्शन के रूप में उभरा है। लेकिन सवाल ये होता है कि कौन सा लोन ज्यादा सही रहेगा? गोल्ड लोन या पर्सनल लोन?
दोनों की अपनी-अपनी खासियत और सीमाएं हैं। अगर आप सही तुलना करके फैसला करें, तो ब्याज का बोझ कम होगा और जरूरत भी समय पर पूरी हो जाएगी। वैसे भी पैसों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग बैंक से पर्सनल लोन और दूसरे विकल्पों का तलाश करते है। ऐसे में गोल्ड लोन भी एक ऑप्शन हो सकता है।
ब्याज दरों की तुलना करें
अगर आपका मकसद कम ब्याज पर लोन लेना है, तो गोल्ड लोन आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसकी वजह से है कि गोल्ड को गिरवी रखकर लोन दिया जाता है, इसलिए बैंकों और NBFCs का रिस्क कम होता है और वे कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। इसके उलट, पर्सनल लोन (Personal Loan) बिना किसी सिक्योरिटी के दिया जाता है, इसलिए आम तौर पर उस पर ज्यादा ब्याज देना पड़ता है।
खासकर अगर आपका क्रेडिट स्कोर एवरेज है। अगर घर या बैंक के लॉकर में सोना पड़ा है, तो उसे इस्तेमाल करके कम लागत पर फंड जुटाना बेहतर हो सकता है। लेकिन अगर आपके पास गिरवी रखने के लिए पर्याप्त सोना नहीं है, तो फिर पर्सनल लोन पर मिल रहे तमाम ऑप्शन में सबसे कम ब्याज दर वाले लोन पर फोकस करें।
क्रेडिट स्कोर कम होने पर करें यह काम
कई लोग खराब या कम क्रेडिट स्कोर (Credit Score) की वजह से पर्सनल लोन लेने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गोल्ड लोन में आपकी क्रेडिट हिस्ट्री उतनी अहम नहीं होती, क्योंकि बैंक को आपके गोल्ड के रूप में सुरक्षा मिल जाती है। अगर आपका CIBIL स्कोर दिक्कत पैदा कर रहा है, तो गोल्ड लोन एक आसान विकल्प बन सकता है। वहीं पर्सनल लोन में क्रेडिट स्कोर जरूर चेक किया जाता है।
सोच समझकर करें फैसला
दोनों लोन अपने-अपने फायदे रखते हैं। अगर आपको कम ब्याज दर, फौरन पैसे और लचीला रीपेमेंट चाहिए तो गोल्ड लोन बढ़िया रहेगा। वहीं लंबी अवधि और भावनात्मक सुरक्षा के लिए पर्सनल लोन पर विचार किया जा सकता है। फैसला लेते समय अपनी आर्थिक स्थिति और चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखना सबसे जरूरी है।