Gold Rate Crash Alert: सोने के भाव में बड़ी गिरावट के संकेत, ₹1,00,000 के नीचे गिरेगा भाव? जानें क्या है वजह

Gold Price Crash Alert: रूस एक बार फिर अमेरिका के साथ डॉलर में ट्रेड शुरू करने पर विचार कर रहा है। रूस के इस कदम से सोने की कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।  

Shivam Shukla( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
अपडेटेड15 Feb 2026, 05:04 PM IST
Gold Rate Crash Alert
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Gold Price Crash Alert: साल 2025 में निवेशकों को बंपर मुनाफा देना वाला सोना जनवरी 2026 में 1,80,000 रुपये के पार जाकर रिकॉर्ड हाई बनाया था, लेकिन फरवरी महीने में यह जमीन पर आता दिख रहा है। पिछले शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई। यानी रिकॉर्ड हाई से लगभग 24,500 रुपये नीचे गिर चुका है। इंटरनेशनल मार्केट (COMEX) में भी यही हाल है। यहां सोना अपने शिखर से 10.50% टूटकर $5,046 पर आ गया है।

रूस के इस कदम से सोने में भारी गिरावट के संकेत

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतों में जो तूफानी तेजी थी, अब उस पर ब्रेक लग चुका है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस एक बार फिर अमेरिका के साथ डॉलर में ट्रेड शुरू करने पर सहमति बना रहा है। पिछले कुछ सालों से रूस और चीन मिलकर डी-डॉलराइजेशन यानी डॉलर मुक्त व्यापार की अगुवाई कर रहे थे और सोने का भंडार जमा कर रहे थे।

लेकिन अब खबर है कि पुतिन प्रशासन सात मुख्य सेक्टरों में अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी चाहता है। इसमें डॉलर बेस्ड पेमेंट सिस्टम में वापसी सबसे महत्वपूर्ण है। माना जा रहा है कि यह कदम रूस-यूक्रेन वॉर खत्म करने के किसी सीक्रेट एग्रीमेंट का हिस्सा हो सकता है। अगर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश (रूस) वापस डॉलर में व्यापार शुरू करता है, तो यह सोने की मांग के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।

थमेगी सेंट्रल बैंकों की खरीदारी

सोने की कीमतों को आसमान पर पहुंचाने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की बड़ी भूमिका रही है। SEBI रजिस्टर्ड एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि जब से डोनाल्ड ट्रंप दोबारा व्हाइट हाउस पहुंचे और टैरिफ पॉलिसी शुरू हुई, तब से देशों ने डॉलर के बजाय सोने को सुरक्षित विकल्प मानकर खरीदना शुरू कर दिया था।

उन्होंने कहा, ‘BRICS देशों के बैंक दुनिया का 50% से ज्यादा सोना खरीद रहे थे, जिससे बाजार में इसकी कमी हो गई थी और दाम बढ़ गए थे। लेकिन अब अगर रूस वापस डॉलर की ओर मुड़ता है, तो न सिर्फ खरीदारी रुकेगी, बल्कि ये बैंक अपना जमा किया हुआ सोना बाजार में बेचना भी शुरू कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतें तेजी से नीचे गिरेंगी।’

1,00,000 के नीचे आ सकता है सोना?

PACE 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल ने सोने को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा कि सोना अपना रिकॉर्ड हाई लेवल देख चुका है। अब इसमें जो भी थोड़ी बहुत तेजी आती है, वह महज एक डेड कैट बाउंस होगी। उनका अनुमान है कि 2027 के आखिर तक भारत में सोने की कीमतें 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से भी नीचे गिर सकती हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह $3,000 प्रति औंस तक लुढ़क सकता है। उन्होंने सलाह दी है कि अब सोने को सुरक्षित निवेश मानना जोखिम भरा हो सकता है। इसकी जगह लॉन्ग टर्म के सरकारी बॉन्ड सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाले साबित हो सकते हैं।

ट्रंप फैक्टर और रूस की नई चाल

इसके अलावा, क्रेमलिन के एक इंटरनल मेमो से संकेत मिले हैं कि रूस अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ जीवाश्म ईंधन (fossil fuels), प्राकृतिक गैस और कच्चे माल के क्षेत्र में बड़ी साझेदारी देख रहा है। ट्रंप की पॉलिसी हमेशा से डॉलर को मजबूत करने की रही है। रूस को पता है कि अगर उसे अमेरिकी मार्केट और टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना है, तो उसे डॉलर को अपनाना ही होगा।

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