Gold vs Silver ETF returns comparison: शेयर बाजार की तेज उठापटक और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच साल 2025 में निवेशकों का भरोसा एक बार फिर कीमती धातुओं पर बढ़ गया है। खासकर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) ने निवेश के पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। डिजिटल निवेश के इन विकल्पों ने न सिर्फ सुरक्षित रिटर्न दिया है, बल्कि टैक्स नियमों और सरकारी नीतियों में बदलाव के चलते इनकी लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है। निवेशक अब जोखिम से बचने के लिए सोना और चांदी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
साल 2025 में चांदी निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सरप्राइज साबित हुई है। इस साल चांदी की कीमतों में 137% से ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगर तुलना करें तो सोने ने भी करीब 68% का मजबूत रिटर्न दिया है, लेकिन चांदी ने रिटर्न के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया। इस तेज उछाल के चलते सिल्वर ईटीएफ में निवेश का रुझान तेजी से बढ़ा है और नए निवेशक भी इस सेगमेंट में एंट्री ले रहे हैं।
ईटीएफ में बढ़ते निवेश के पीछे सरकारी नीतियों की भी अहम भूमिका रही है। बजट 2024 में नॉन-इक्विटी म्यूचुअल फंड (डेट को छोड़कर) के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नियमों में बदलाव किया गया, जिससे गोल्ड ईटीएफ टैक्स के लिहाज से ज्यादा फायदेमंद बन गए। इसके अलावा, सरकार द्वारा नए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) जारी न किए जाने से निवेशकों ने मजबूरी में ईटीएफ का रास्ता चुना, जिससे इसमें निवेश और बढ़ गया।
साल 2025 में शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और करेक्शन देखने को मिला है। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक महंगाई और आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता रहा है। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद ने भी सोने की कीमतों को मजबूती दी है, जिससे गोल्ड ईटीएफ की मांग बढ़ी है।
फिजिकल सोना या चांदी खरीदने में शुद्धता, मेकिंग चार्ज और सुरक्षित स्टोरेज जैसी कई परेशानियां होती हैं। ईटीएफ इन सभी झंझटों से छुटकारा दिलाता है। इसमें न तो मेकिंग चार्ज लगता है और न ही लॉकर का खर्च। निवेशक एसआईपी के जरिए छोटी रकम से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। साथ ही, ईटीएफ की लिक्विडिटी बहुत ज्यादा होती है, जिससे जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से बेचकर कैश में बदला जा सकता है।
चांदी की कीमतों में आई तेजी के पीछे निवेश के साथ-साथ इसकी मजबूत औद्योगिक मांग भी बड़ा कारण है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत डिमांड और सीमित सप्लाई के चलते 2026 में भी चांदी की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि एकमुश्त निवेश के बजाय गिरावट के समय चरणबद्ध निवेश करें, ताकि जोखिम कम किया जा सके।
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