
Gold Silver Price Crash in March 2026: सोने-चांदी की कीमतों में साल 2025 की शानदार रैली के बाद 2026 में भी मालामाल करने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन मार्च महीने में इन सारी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में कीमती धातुओं की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट आई है। मार्च में साल 1980 के बाद की यह सबसे बड़ी मंथली गिरावट दर्ज की गई। महज एक महीने के भीतर सोने ने अपनी चमक का 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खो दिया है, वहीं चांदी तो 35 प्रतिशत तक लुढ़क गई। इस गिरावट ने साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में हुई बढ़त को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
दरअसल, जब भी दुनिया में युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है, तो लोग अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए सोने की ओर भागते हैं। लेकिन इस बार मामला उल्टा नजर आ रहा है। पिछले महीने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए तनाव के बावजूद सोने की कीमतें संभलने के बजाय लगातार गिर रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समय सोना और चांदी अन्य निवेश विकल्पों के सामने टिक नहीं पा रहे हैं। जब बाजार में ऐसे विकल्प मौजूद हों, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ बेहतर रिटर्न भी मिल सके, तो निवेशक सोने जैसे एसेट्स से पैसा निकालने लगते हैं। इन पर पर कोई ब्याज भी नहीं मिलता है।
आंकड़ों पर नजर डालें, तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 2 मार्च 2026 को सोना 1,67,000-1,68,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, आज, 24 मार्च को सोने की कीमत 1,36,762 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। ऐसे में सोना मार्च में 31,000 रुपये या 18.5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज कर चुका है। इसी तरह, 2 मार्च 2026 को चांदी 2,85,000-2,86,000 रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी। वहीं, आज MCX पर 2,18,628 रुपये प्रति किलो के भाव पर ट्रेड कर रही थी। ऐसे में अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान चांदी की कीमतों में 67,000 रुपये या 23.5% प्रति किलो से ज्यादा की गिरावट आई है।
सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला शानदार रिटर्न है। मौजूदा समय में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पिछले कई महीनों के हाई लेवल पर पहुंच गई है। निवेशकों को लग रहा है कि बढ़ती महंगाई को कंट्रोल करने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। यही स्थिति दुनिया के अन्य देशों में भी है। ऑस्ट्रेलिया में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 2011 के बाद के हाई लेवल पर है, जबकि भारत, जापान और साउथ कोरिया में भी बॉन्ड मार्केट काफी मजबूत हुआ है। ऐसे में निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकाल कर बॉन्ड मार्केट की तरफ भाग रहे हैं।
मनी कंट्रोल को फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के एक्सपर्ट्स ने बताया, "इस समय मार्केट में केवल डॉलर इंडेक्स और क्रूड ऑयल ही मजबूती दिखा रहे हैं। केंद्रीय बैंक अब अपना फंड गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने के बजाय महंगे तेल की खरीद में लगा रहे हैं। आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले कुछ समय तक कीमती धातुओं के दाम दबाव में रह सकते हैं। अगर आप खरीदारी का मन बना रहे हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि सोना अब टेक्निकली बियरिश जोन में एंट्री कर चुका है। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और ब्याज दरों को लेकर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल नजर आ रहा है।"
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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