Gold-Silver Price Drop: ग्लोबल लेवल पर अनिश्चितता के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। हफ्ते की शुरुआत में ही बुलियन मार्केट में सुस्ती देखी जा रही है। ग्लोबल लेवल पर हो रहे बदलावों ने सोने और चांदी की कीमतों तोड़ दिया है। इस गिरावट का सीधा संबंध आम आदमी की बचत और निवेश से जुड़ा है। दरअसल, जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल मचती है, तो इसका असर सीधे आपकी स्थानीय दुकानों तक पहुंचता है। फिलहाल, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के बीच एक सवाल खड़ा कर दिया है। क्या कीमती धातुओं में और गिरावट आने वाली है।
इन कारणों से सोने-चांदी की कीमतों में आ रही गिरावट
डॉलर में मजबूती: सोने की कीमतों में आई इस हालिया गिरावट के पीछे का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर है। जब डॉलर अन्य करेंसीज के मुकाबले मजबूत होता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में सोना महंगा हो जाता है। लिहाजा, अन्य करेंसी रखने वाले निवेशक खरीदारी कम कर देते हैं, जिससे मांग घटती है और कीमतें गिर जाती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी: इसके साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी मांग कम करने में अहम भूनिका निभाई है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है। एक्सपर्ट्स इस स्थिति को देखते हुए कह रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को हाई रख सकता है। जब ब्याज दरें हाई होती हैं, तो निवेशक सोने जैसे नॉन-यील्ड वाले एसेट्स के बदले ब्याज देने वाले बॉन्ड्स में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं।
ग्लोबल अनिश्चितता: इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता और अमेरिका-ईरान के बीच शांति प्रयासों में आई रुकावट ने बाजार को अनिश्चित बना दिया है। आमतौर पर संकट के समय सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में बढ़ती ब्याज दरों की संभावना ने इस बढ़त को रोक दिया है। एक बड़ा कारण प्रॉफिट बुकिंग भी है।
4 हफ्तों की तेजी बाद अब निवेशक कर रहे मुनाफावसूली
बता दें कि पिछले चार हफ्तों से सोने की कीमतों में शानदार तेजी देखी जा रही थी। लेकिन, पिछले हफ्ते की 2.5% की गिरावट दर्ज की गई। यानी जिन निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी की थी, वे अब अपना मुनाफा वसूल कर रहे हैं। बाजार की यह स्थिति किसी स्थायी बदलाव की बजाय एक करेक्शन है।
क्या भारत में कम हो गई सोने की डिमांड
गौरतलब है कि ग्लोबल लेवल पर कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत जैसे देशों में फिजिकल गोल्ड की डिमांड अभी भी मजबूत बनी हुई है। भारत में सोने पर प्रीमियम पिछले दो महीनों के हाई लेवल पर पहुंच गया है। दरअसल, मार्केट में सप्लाई की कमी देखी जा रही है। वहीं, चीन में भी खरीदारी बढ़ा दी है है। हालांकि, दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड-बैक्ड ईटीएफ (SPDR Gold Trust) की होल्डिंग्स में 0.2% की मामूली कमी आई है, जो बड़े संस्थागत निवेशकों की थोड़ी सावधानी को दर्शाता है।