Gold-Silver price crash: पिछले कुछ दिनों से आसमान छू रहे सोने-चांदी के दाम अचानक ऐसे फिसले कि निवेशकों के हाथ-पांव फूल गए। शुक्रवार का दिन कमोडिटी बाजार के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा। MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक, हर तरफ तेज गिरावट और भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जो निवेशक एक दिन पहले रिकॉर्ड ऊंचाई पर मुनाफा गिन रहे थे, वे अगले ही दिन नुकसान देखकर हैरान रह गए।
रिकॉर्ड हाई से 9% टूटा गोल्ड
सोने के वायदा भाव में शुक्रवार को जोरदार गिरावट दर्ज की गई। फरवरी डिलिवरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट की कीमत करीब 9 फीसदी टूटकर 1,54,157 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इससे एक दिन पहले ही सोना लगभग 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई तक पहुंचा था। यानी बेहद कम समय में सोने ने ऊंचाई से गहराई का सफर तय कर लिया।
एक दिन में एक लाख से ज्यादा टूटी चांदी
चांदी में गिरावट और भी चौंकाने वाली रही। गुरुवार को जहां MCX पर चांदी के भाव उछलकर करीब 3,99,893 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे, वहीं शुक्रवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 5 मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी फिसलकर 2,91,922 रुपये प्रति किलो पर आ गई। यानी महज एक दिन में करीब 1,07,971 रुपये प्रति किलो की गिरावट। बाजार में इसे अब खुलकर “सिल्वर प्राइस क्रैश” कहा जा रहा है।
कब तक जारी रहेगा ये उतार-चढ़ाव?
LKP सिक्योरिटीज में वीपी (रिसर्च) जतिन त्रिवेदी का कहना है कि यह गिरावट अचानक नहीं आई। उनके मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में CME पर मार्जिन बढ़ने के बाद जोरदार मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे गोल्ड $5,500 के शिखर से फिसलकर $5,000 के आसपास आ गया।
उन्होंने बताया कि MCX पर इसका असर और तेज दिखा, जहां सोना ₹1,80,000 के ऊपर के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर ₹1,55,000 के करीब तक आ गया। उनका साफ कहना है कि इतनी ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति कुछ और सेशंस तक बनी रह सकती है, जब तक बाजार में खरीदार और विक्रेता के बीच संतुलन दोबारा नहीं बन जाता।
टेक्निकल नजरिए से देखें तो CME पर गोल्ड $4,800 से $5,200 के दायरे में झूलता रह सकता है। अगर $4,800 के नीचे मजबूत ब्रेक मिलता है, तो गिरावट $4,500 तक भी खिंच सकती है। वहीं MCX पर सोने के ₹1,58,000 से ₹1,70,000 के दायरे में घूमने की संभावना जताई जा रही है।
सोने-चांदी की कीमतों में ये बदलाव आखिर क्यों?
कन्वर्सेशन यूके की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में सोने और चांदी के दाम इसलिए चढ़े क्योंकि दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ी है। वैश्विक तनाव, ट्रेड वॉर की आशंका और ब्याज दरों को लेकर भ्रम के चलते निवेशकों ने सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोना-चांदी खरीदी। सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी से भी सोने को सपोर्ट मिला।
चांदी में तेजी की वजह इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड रही। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ते इस्तेमाल ने कीमतों को ऊपर पहुंचाया। वहीं, जैसे-जैसे दाम बढ़े, रिटेल निवेशकों की खरीद भी तेज हुई। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय खबरों के बाद मुनाफावसूली शुरू हुई, जिससे दाम फिसल गए और बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
निवेश से पहले दो बार सोचने की सलाह
मार्केट एक्सपर्ट सुमित बगाड़िया का मानना है कि चांदी में अभी और करेक्शन आ सकता है और दामों में कम से कम ₹1 लाख तक की और गिरावट संभव है। वहीं आशु मदन निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर चांदी से पूरी तरह बाहर निकलने की सलाह दे रहे हैं।
सोना-चांदी में आई यह भारी गिरावट साफ संकेत देती है कि बाजार फिलहाल बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। जब तक पोजीशन नॉर्मल नहीं होतीं और खरीदार-बिक्री करने वालों के बीच संतुलन वापस नहीं आता, तब तक तेज उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जल्दबाजी की बजाय सतर्क रहना ही निवेशकों के लिए बेहतर रणनीति मानी जा रही है।