
Gold Silver ETF Return in 1 Year: पिछले एक साल की अवधि में चांदी पर आधारित फंड्स ने निवेशकों को करीब-करीब बराबर का रिटर्न दिया है। गोल्ड फंड्स और ETF मिलाकर औसतन 50.94 प्रतिशत रिटर्न रहा, जबकि चांदी के ETF ने 51.14 प्रतिशत का एवरेज मुनाफा दिया है। सोने और चांदी के रिटर्न में अंतर महज 0.2 प्रतिशत का है। इससे साफ पता चलता है कि रिटर्न के मामले में दोनों ही मेटल्स बराबर हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 31 गोल्ड स्कीम्स में टाटा गोल्ड ETF ने सबसे अधिक 52.27 प्रतिशत का रिटर्न दिया। वहीं टाटा गोल्ड ETF FOF सबसे कम 48.77 फीसदी पर रहा। इसी तरह, चांदी के 21 ETF में टाटा सिल्वर ETF टॉप पर रहा, जिसने 52.81 फीसदी रिटर्न दिया। सबसे कम रिटर्न एडलवाइस सिल्वर ईटीएफ का रहा। इसने 48.77 फीसदी रिटर्न दिया।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल रिटर्न देखकर निवेशित होने का फैसला ठीक नहीं। असली खेल वोलेटिलिटी यानी जोखिम का है। एक रुपये की कमाई के लिए कितना उतार-चढ़ाव झेलना पड़ा, यही तय करता है कि निवेश कितना सुरक्षित रहा। इतिहास की ओर नजर डाली जाए, तो चांदी के मुकाबले सोने इस मामले में आगे है। कम वोलेटिलिटी के साथ गोल्ड ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। जानकारों का कहना है कि शॉर्ट टर्म में सिल्वर गोल्ड को पीछे छोड़ सकती है, खासकर जब इंडस्ट्रीयल डिमांड बढ़ती है। लेकिन लॉन्ग टर्म के लिए सोना स्टैबल और भरोसेमंद विकल्प है।
बता दें कि पिछले 30 साल के डेटा हैरान करने वाले हैं। कई टाइम पीरिएड में गोल्ड ने इक्विटी को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही इसमें कल वोलेटिलिटी और नुकसान भी देखा गया। यह वजह है लॉन्ग टर्म के लिए सोने को निवेश के लिए अच्छा विकल्प माना जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं, तो 15 प्रतिशत हिस्सा सोने में रखें। यह स्थिरता देगा। चांदी में 5-10 प्रतिशत का टैक्टिकल इन्वेस्टमेंट किया जा सकता है। लेकिन यह तब जब इंडस्ट्रीयल डिमांड में भारी उछाल हो।
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