Gold और सिल्वर ETFs में कहां निवेश करने पर होगी बंपर कमाई, यहां जानिए पूरी डिटेल

Gold vs silver ETFs: बहुत से निवेशक बेहतर निवेश के विकल्प की तलाश में जुटे रहते हैं। कुछ स्ट़ॉक मार्केट में निवेश करते हैं तो कुछ सोने में या अन्य जगह निवेश करते हैं। इस बीच सोने की बढ़ती कीमत और त्योहारी सीजन की खरीदारी के चलते निवेशकों की नजर अब कागज़ी सोना और चांदी पर है। 

Jitendra Singh
अपडेटेड13 Oct 2025, 04:07 PM IST
Gold vs silver ETFs:  गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में निवेशकों को कीमती धातुओं में निवेश का मौका मिलता है।
Gold vs silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में निवेशकों को कीमती धातुओं में निवेश का मौका मिलता है।

Gold vs silver ETFs: त्योहारी सीजन में सोने की बढती कीमतों के बीच लोग अब फिजिकल गोल्ड के बजाय कागजी गोल्ड खरीदने में जुटे हुए हैं। निवेशक तेजी से एक्सचेंज -ट्रेडेड विकल्पों की तालश कर रहे हैं। इसमें सोने की चोरी का कोई डर नहीं रहता है और निवेश के लिहाज से रिटर्न भी मोटी मिलने की संभावना बनी रहती है। गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) दोनों ही निवेशकों को कीमती धातुओं में निवेश का अवसर मिलता है। लेकिन ये दोनों तरीके खरीद, मूल्य निर्धारण और टैक्स में अलग हैं।

ETFs और FoFs में अंतर

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, एक्पर्ट्स का कहना है कि मुख्य अंतर खरीद और बिक्री के तरीके में है। ETFs शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं और इसके लिए डिमैट खाता जरूरी है। वहीं, FoFs सीधे फंड हाउस से खरीदे जाते हैं और दिन के अंत में तय नेट असेट वैल्यू (NAV) पर मूल्य निर्धारित होता है। जानकारों का कहना है कि जो निवेशक ट्रेडिंग और डिमैट खाता रखने में सहज हैं, वे ETFs से फायदा उठा सकते हैं। वहीं जिन लोगों को आसान विकल्प चाहिए या जि नलोगों डिमैट खाता नहीं है, वो FoFs चुन सकते हैं।

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किसे कहां निवेश करना चाहिए?

बिजनेस स्टैंडर्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, अजय लखोटिया का कहना है कि युवा निवेशकों के लिए ETFs बेहतर हैं। इसकी वजह ये है कि ये सोने और चांदी की कीमतों के सीधे और कम लागत वाले एक्सपोज़र देते हैं। उन्होंने कहा कि युवा निवेशक भी ETF यूनिट्स शेयर की तरह खरीद सकते हैं, जबकि बड़े पोर्टफोलियो वाले निवेशक FoFs में आसानी से डाइवर्सिफिकेशन कर सकते हैं। वहीं रविकुमार टी का कहना है कि FoFs उन लोगों के लिए अच्छे हैं जो म्यूचुअल फंड स्टाइल निवेश या SIP पसंद करते हैं। “युवा सैलरी वाले निवेशक जो छोटे निवेश के साथ लिक्विडिटी चाहते हैं, वे ETFs चुनते हैं, जबकि अनुभवी निवेशक डाइवर्सिफिकेशन के लिए FoFs को वरीयता देते हैं।”

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लागत, टैक्स और ट्रैकिंग

जानकारों का कहना है कि ETFs में लागत कम होती है। विश्‍वनाथन अय्यर, सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर – फाइनेंस, Great Lakes Institute of Management Chennai के अनुसार, “ETFs का खर्च 0.25–0.5% होता है, जबकि FoFs का 0.6–1% होता है क्योंकि इसमें अतिरिक्त लागत जुड़ती है।” टैक्सेशन भी अलग है। ETFs में 12 महीने से अधिक होल्ड किए गए यूनिट्स पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5% लगता है, जबकि FoFs में यह अवधि 24 महीने है। ETFs में ट्रैकिंग एरर कम होती है, जबकि FoFs में थोड़ी अधिक हो सकती है।

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