Gold vs Silver Investment: जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो अक्सर लोग सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं। खुदरा निवेशकों के बीच यह सबसे बड़ा भ्रम है कि संकट के समय सोने की तरह ही चांदी भी सुरक्षा देते है। ऐतिहासिक रूप से सोने ने खुद को एक मॉनेटरी मेटल के रूप में स्थापित किया है। जब दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति या वित्तीय अस्थिरता आती है, तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंक और निवेशक सोने की तरफ अपना रुख कर लेते हैं। दूसरी तरफ, चांदी की पहचान दोहरी है। चांदी सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण इंडस्ट्रीयल मेटल भी है।
क्या सोने की जगह चांदी को खरीदना सुरक्षित?
कुल चांदी की मांग का लगभग 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) जैसी इंडस्ट्री से आता है। इसका मतलब कि चांदी की कीमत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। अगर दुनिया में आर्थिक मंदी आती है, तो चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड घट जाती है। ऐसी स्थिति में, चांदी सोने की तरह व्यवहार करने के बजाय तांबे जैसी बेस मेटल्स की तरह बर्ताव करने लगती है। इसके साथ ही इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिलती है। इसलिए, सुरक्षा के लिहाज से सोने की जगह चांदी खरीदना जोखिम को कम करने के बजाय और बढ़ा सकता है।
चांदी पर अदृश्य टैक्स
चांदी में निवेश करते वक्त लोग इसकी भारी अस्थिरता को बड़ी कमाई का मौका समझ लेते हैं। विज्ञापन और बाजार की खबरें अक्सर इसकी उछाल को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं, लेकिन लंबे समय के निवेश पर यह अस्थिरता एक बिना दिखने वाले टैक्स की तरह काम करती है।
लॉन्ग टर्म में सोने के मुकाबले चांदी का प्रदर्शन
आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2011 में चांदी की कीमत अपने चरम पर थी, उसके बाद इसमें 50 फीसदी तक की गिरावट आई। इसके बाद चांदी की कीमतों में इस स्तर का उछाल आने में एक दशक का समय लग गया। वहीं, 1990 से 2024 के बीच का डेटा देखें, तो सोने ने लगभग 10.6 प्रतिशत की सालाना दर (CAGR) से रिटर्न दिया, जबकि चांदी केवल 7.6 प्रतिशत पर सिमट गई। चांदी का यह कम रिटर्न भी बहुत अधिक जोखिम और उतार-चढ़ाव के साथ आया।