
Gold Silver ETF Price Fall Today: होली के दिन यानी बुधवार, 4 मार्च को शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। आज के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी (Nifty 50) दोनों इंडेक्स 2% से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज किए। आज सुबह सेंसेक्स 1,800 अंक या 2.2% टूटकर इंट्राडे में 78,443.20 के लेवल पर आ गया था। वहीं, निफ्टी 50 भी 550 से ज्यादा अंक या 2.3% लुढ़ककर 24,305.40 के स्तर पर आ गया था। इसी बीच, BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 2% से ज्यादा गिरे, जिससे बाजार में जबरदस्त बिकवाली का माहौल बन गया। वहीं, गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (Gold Silver ETF) की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को छुट्टी के कारण भारतीय बाजार बंद थे, लेकिन ग्लोबल लेवल पर हुई उथल-पुथल का सीधा असर आज दिखा। बाजार खुलते ही गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (ETF) में भारी गिरावट दर्ज की गई।
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा नुकसान चांदी से जुड़े निवेश में देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को चांदी की कीमतों में 8% की भारी गिरावट आई थी, जिसका असर आज सिल्वर ईटीएफ (ETF) पर देखने को मिला। आज सुबह टाटा सिल्वर ETF में सबसे बड़ी 7.43% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF में 7.33% की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं SBI सिल्वर ETF और निप्पॉन इंडिया सिल्वर EFT के निवेशकों को भी भारी नुकसान हुआ है। ये फंड्स क्रमशः 7.18% और 7.12% की गिरावट दर्ज किए।
गोल्ड ईटीएफ में भी कमजोरी देखने को मिली है। ग्लोबल लेवल पर पिछले सत्र में सोने की कीमतों में 4% से ज्यादा की गिरावट आई थी। आज ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF में 3.87% की बड़ी गिरावट देखी गई, जबकि SBI गोल्ड ETF भी 3.52% तक नीचे आ गया। इसी तरह निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ में 3.30% और टाटा गोल्ड ईटीएफ में लगभग 3.09% की गिरावट दर्ज की गई।
गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में आई गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बदलता नजरिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध से ग्लोबल इकोनॉमी का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में कटौती को टाला जा सकता है। आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 92.17 के लेवल तक गिरकर नया रिकॉर्ड बनाया।
अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरकर ने कहा, 'भारतीय रुपये की चाल को ग्लोबल डॉलर की ताकत, बदलती मैक्रोइकॉनॉमिक स्थितियों और क्रूड ऑयल की कीमतों के नजरिए से देखना चाहिए। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो ट्रेड बैलेंस और करेंसी पर दबाव पड़ता है। कुछ हद तक रुपये का कमजोर होना आज के जुड़े हुए फाइनेंशियल सिस्टम में कोई बड़ी बात नहीं है। असल में जरूरी यह है कि यह गिरावट व्यवस्थित तरीके से हो और बुनियादी बातों पर टिकी रहे।
एक बैलेंस्ड और कंट्रोल्ड गिरावट से एक्सपोर्ट को फायदा मिल सकता है। इसके साथ ही बाहरी असंतुलन ठीक करने में मदद मिलती है। लेकिन अगर रुपये में तेज या लगातार कमजोरी आती है तो खतरे भी बढ़ जाते हैं। इससे आयातित महंगाई बढ़ सकती है, करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है, विदेशी कर्ज चुकाने का बोझ बढ़ सकता है और ऊर्जा की महंगाई का असर और गहरा हो सकता है।'
हालांकि, बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार रिकवरी देखी गई। स्पॉट सोना 1% के उछाल के साथ 5,138.46 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि पिछले ट्रेडिंग सेशन में यह 20 फरवरी के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, स्पॉट चांदी 1.4% की बढ़ोतरी के साथ 83.27 डॉलर प्रति औंस के लेवल पर पहुंच गई। पिछले सत्र में इसने 8% की भारी गिरावट दर्ज की थी।
वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोन और चांदी की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। आज सुबह सोना 2157 रुपये या 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी के साथ 163265 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह चांदी 5781 रुपये या 2% से ज्यादा के उछाल के साथ 271099 रुपये प्रति किलो के भाव पर पहुंच गई।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें, व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।
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