ब्याज दरों के मोड़ पर खड़ा बाजार: क्या अभी लोन लेना फायदेमंद है? जानिए पूरी डिटेल

Loan: भारत में ब्याज दरों का चक्र अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां आगे दरों में बड़ी कटौती की गुंजाइश कम नजर आ रही है। जानकारों का मानना है कि यह समय लोन लेने के लिहाज से बेहतर हो सकता है, लेकिन फैसला सोच-समझकर करना जरूरी है।

Jitendra Singh
अपडेटेड14 Apr 2026, 05:26 PM IST
Loan: होम लोन की दरें 7.10% से और कार लोन की दरें 7.35% से शुरू होती हैं।
Loan: होम लोन की दरें 7.10% से और कार लोन की दरें 7.35% से शुरू होती हैं।

Loan: देश में ब्याज दरों का माहौल तेजी से बदल रहा है। पिछले कुछ समय में दरों में गिरावट देखने को मिली, जिससे कर्ज लेना आसान और सस्ता हुआ। लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि यह दौर अपने आखिरी चरण की ओर है। वित्तीय विशेषज्ञ इसे “इन्फ्लेक्शन पॉइंट” यानी ऐसा मोड़ बता रहे हैं जहां से ब्याज दरों की दिशा बदल सकती है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो घर, गाड़ी या किसी अन्य जरूरत के लिए लोन लेने की सोच रहे हैं। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या अभी लोन लेना सही रहेगा या इंतजार करना बेहतर होगा।

RBI ने 2025 की शुरुआत से रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। इससे उधार लेने की लागत में काफी कमी आई है। हालांकि, ऊर्जा की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई में संभावित रुकावटों के कारण महंगाई का जोखिम फिर से उभरने लगा है। FY27 में CPI महंगाई दर के बढ़कर 4.6% तक पहुंचने और कुछ तिमाहियों में 5 फीसदी से ऊपर तक पहुंचने के अनुमान को देखते हुए, सेंट्रल बैंक द्वारा दरों में तेजी से कटौती जारी रखने की संभावना कम नजर आ रही है।

पहले क्यों सस्ते हुए लोन?

पिछले एक साल में भारतीय रिजर्व बैंक ने आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की थी। इसका असर यह हुआ कि बैंकों ने भी अपने लोन सस्ते कर दिए। होम लोन और अन्य कर्जों पर ब्याज दरें कम हुई हैं। इससे EMI का बोझ कम हुआ। कई बैंकों ने रेपो रेट से जुड़े लोन पर दरें घटाकर लगभग 7.3 से 7.5 फीसदी तक कर दिया। इससे नए कर्ज लेने वालों के लिए माहौल काफी अनुकूल बन गया।

कर्जदारों के लिए मददगार

इस समय, बाजार का माहौल कर्ज ले कर्ज़दारों के लिए मददगार है। दरों में कटौती के बाद, कर्ज देने की दरें कम हो गई हैं। अब होम लोन की दरें 7.10% से और कार लोन की दरें 7.35% से शुरू होती हैं। ये दरें लोन देने वाली संस्था और लोन लेने वाले की प्रोफाइल पर निर्भर करती हैं।

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इससे EMI और कुल ब्याज का बोझ कम हो जाता है। प्रॉपर्टी की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता और पिछले साल GST दरों में कटौती के कारण ऑटोमोबाइल की कीमतों में आई कुछ नरमी को मिलाकर, दोनों ही मोर्चों पर खरीदने की क्षमता में सुधार हुआ है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में होम लोन की ब्याज दरें दो-तीन साल पहले के मुक़ाबले काफी कम हैं।

घर या गाड़ी खरीदने का सही मौका

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में पैसाबाजार (Paisabazaar) की CEO, संतोष अग्रवाल का कहना है कि अभी होम और कार लोन की ब्याज दरें काफी कम हैं। इसलिए लोन लेने वाले इस मौके का फायदा उठाकर गाड़ी या घर खरीद सकते हैं। वे कहती हैं कि लोन लेने इस बात का भी ध्यान रखें कि भविष्य में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है या EMI बढ़ सकती है।

अब क्यों बदल सकता है रुख?

अब स्थिति धीरे-धीरे बदलती दिख रही है। महंगाई को लेकर फिर से चिंता बढ़ रही है। अनुमान है कि आने वाले समय में महंगाई दर ऊपर जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला कर सकता है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इन सभी कारणों का असर भारत की अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों पर पड़ना तय है।

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RBI की मौजूदा रणनीति

फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा गया है। केंद्रीय बैंक एक तरफ महंगाई को काबू में रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक विकास को भी बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब RBI के पास दरों में ज्यादा कटौती की गुंजाइश सीमित है। यानी आगे चलकर या तो दरें स्थिर रहेंगी या फिर धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं।

लोन लेते समय इन 5 बातों को ध्यान रखें

1. ब्याज दर और उसके तरीके को समझें

लोग अक्सर सिर्फ ब्याज दर देखकर लोन लेने का निर्णय कर लेते हैं। लेकिन यह ध्यान रखें कि दर फिक्स है या फ्लोटिंग। शुरुआती दर कम लग सकती है, लेकिन समय के साथ बढ़ सकती है। आपकी वास्तविक दर आपकी आय, नौकरी, क्रेडिट स्कोर और पिछले लोन रिकॉर्ड पर निर्भर करती है। इसलिए हमेशा लिखित में वास्तविक दर की पुष्टि करें।

2. खाते में कितनी रकम आएगी, यह जानना जरूरी

अक्सर लोन अप्रूव होने के बाद प्रोसेसिंग फीस, बीमा शुल्क और अन्य चार्ज पहले ही काट लिए जाते हैं। नतीजा यह होता है कि खाते में आने वाली रकम आपकी उम्मीद से कम होती है। दो लोन ऑफर की EMI एक जैसी लग सकती है, लेकिन कटौतियों के कारण असल रकम में बड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए यह साफ़ पूछना ज़रूरी है कि सभी चार्ज काटने के बाद आपके खाते में कितनी नेट राशि आएगी।

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3. प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर नियम जरूर चेक करें

बहुत कम लोग पूरे टेन्योर तक पर्सनल लोन चलाते हैं। बोनस मिलने, सैलरी बढ़ने या सस्ता लोन मिलने पर लोग लोन जल्दी बंद करना चाहते हैं। ऐसे में प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज अहम हो जाते हैं। यह जांचें कि कहीं लॉक-इन पीरियड तो नहीं है, पार्ट पेमेंट की अनुमति है या नहीं और जल्दी लोन बंद करने पर कितना शुल्क लगेगा। कई बार थोड़ा अधिक ब्याज वाला लेकिन लचीले नियमों वाला लोन लंबे समय में सस्ता पड़ता है।

4. EMI कम है तो टेन्योर और कुल ब्याज देखें

कम EMI आकर्षक लगती है, लेकिन लंबा टेन्योर अधिक ब्याज का कारण बन सकता है। इसलिए सिर्फ EMI पर ध्यान न दें, कुल चुकाने वाली राशि और EMI की तारीख बदलने या टेन्योर घटाने की संभावना जरूर जांचें।

5. लेंडर का व्यवहार और पेनल्टी देखें

कभी-कभी तकनीकी या अन्य कारणों से EMI मिस हो जाती है। कुछ लेंडर तुरंत भारी पेनल्टी चार्ज लगाते हैं और क्रेडिट स्कोर को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए लेंडर की विश्वसनीयता और कस्टमर सर्विस का मूल्यांकन करना जरूरी है।

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