Pension plan: आज का दौर पहले से बिल्कुल अलग है। अब लोग एक ही दफ्तर में सालों तक काम नहीं करते। आजकल बहुत से लोग फ्रीलांस या गिग वर्क में जुटे हैं जैसे जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर, अर्बन कंपनी या ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के लिए काम करना। ऐसे लोग अपने टाइम के हिसाब से काम चुनते हैं और पैसे कमाते हैं, लेकिन इनके पास न पेंशन होती है, न PF का सहारा।
अब सरकार ऐसे ही गिग वर्कर्स और फ्रीलांसर्स के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है- NPS e-Shramik प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर योजना।
क्या है NPS e-Shramik योजना?
सरकार की यह नई पहल उन लाखों लोगों को पेंशन सुरक्षा देने के लिए है जो किसी कंपनी के कर्मचारी नहीं हैं लेकिन रोज कमाई के लिए मेहनत कर रहे हैं। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने इस योजना की शुरुआत की है, जिसमें गिग वर्कर्स को NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
जैसे किसी सरकारी या प्राइवेट नौकरी में काम करने वालों को PF और NPS की सुविधा मिलती है, वैसे ही अब Ola, Swiggy, Blinkit, Urban Company जैसी कंपनियों से जुड़े वर्कर्स और फ्रीलांसर्स भी इस योजना में रजिस्टर होकर भविष्य के लिए पेंशन जमा कर सकेंगे।
कैसे होगा रजिस्ट्रेशन?
- सबसे पहला स्टेप है Quick PRAN बनवाना।
- सबसे पहले वर्कर की KYC डिटेल्स जैसे नाम, पता, PAN, बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर वेरिफाई की जाएंगी।
- अगर ये जानकारी पहले से प्लेटफॉर्म (जैसे Swiggy, Ola या Zomato) के पास है, तो वही डाटा इस्तेमाल किया जाएगा।
- वर्कर की सहमति (consent) मिलने के बाद उसे एक PRAN (Permanent Retirement Account Number) अलॉट किया जाएगा।
- इसके बाद वर्कर को अपने माता-पिता का नाम, ईमेल आईडी और नॉमिनी की जानकारी देनी होगी।
- नॉमिनी की जानकारी 60 दिनों के भीतर देना जरूरी होगा।
कितना करना होगा योगदान?
इस योजना में योगदान तीन तरीकों से किया जा सकता है। पहला- ज्वाइंट रूप से जिसमें कंपनी और वर्कर दोनों मिलकर योगदान कर सकते हैं। दूसरा है- वर्कर-ओनली जिसमें सिर्फ वर्कर योगदान देगा। तीसरा है- प्लेटफॉर्म-ओनली जिसमें केवल कंपनी योगदान देगी।
न्यूनतम योगदान 99 रुपये प्रति माह तय किया गया है, जबकि सामान्य NPS में यह 500 रुपये होता है। खास बात यह है कि रजिस्ट्रेशन बिल्कुल फ्री है और सालाना चार्ज भी सिर्फ 15 रुपये रखा गया है।
रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सहारा
NITI आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2020 में 77 लाख गिग वर्कर्स थे, और 2030 तक यह संख्या 2.35 करोड़ तक पहुंच सकती है। इतने बड़े वर्कफोर्स को आर्थिक सुरक्षा देना बेहद जरूरी हो गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर गिग वर्कर्स नियमित रूप से NPS में योगदान करेंगे, तो कंपाउंडिंग का फायदा मिलेगा और रिटायरमेंट के बाद उन्हें स्थायी पेंशन का सहारा मिलेगा।
NPS e-Shramik योजना से लाखों युवाओं को भविष्य की चिंता से राहत मिलेगी।