सरकार ने सेवा क्षेत्र को मजबूत करने और उससे जुड़े जरूरी कदम सुझाने के लिए एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति बनाने का फैसला किया है। इस समिति का नाम ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ रखा गया है। इसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में की।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस पहल का मकसद भारत को सेवा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाना है। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2047 तक दुनिया के सेवा क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंच जाए। यह समिति ऐसे सेवा क्षेत्रों की पहचान करेगी जिनमें विकास, रोजगार और निर्यात की अच्छी संभावनाएं हैं।
साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों का नौकरियों और जरूरी कौशल पर क्या असर पड़ेगा और उसके अनुसार क्या कदम उठाने चाहिए।वित्त मंत्री ने बताया कि सेवा क्षेत्र ‘विकसित भारत’ का एक अहम आधार है।
देश के कुल निर्यात और जीडीपी में इसका योगदान 50 प्रतिशत से ज्यादा है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच सेवा निर्यात का अनुमानित आंकड़ा करीब 304 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल से अधिक है। यह समिति विभिन्न सेवा उप-क्षेत्रों में मौजूद कमियों को दूर करने और रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने के लिए भी सुझाव देगी।