सरकार सभी तरह के वित्तीय लेन-देन में पैन (Permanent Account Number) दिखाने से जुड़े नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। उद्देश्य यह है कि छोटे और रोजमर्रा के लेन-देन में पैन की अनिवार्यता कम की जाए, जबकि बड़े लेन-देन पर सख्ती बढ़ाई जाए।
सरकार ने नए नियमों का मसौदा तैयार किया है, जिसके अनुसार छोटी रकम के लेन-देन में पैन की जरूरत नहीं होगी। वहीं, बड़े वित्तीय लेन-देन पर निगरानी कड़ी की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि बड़ी रकम कहां से आ रही है और कहां जा रही है। इसका मकसद आम लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना और बड़े सौदों में टैक्स चोरी व गड़बड़ी को रोकना है।
ये बदलाव आयकर नियम 2026 के ड्राफ्ट का हिस्सा हैं, जो आयकर अधिनियम 2025 के तहत लागू होंगे। यह नया कानून 1 अप्रैल से लागू होगा। Central Board of Direct Taxes (CBDT) इन नियमों पर सुझाव लेने के बाद मार्च की शुरुआत तक अंतिम फैसला कर सकता है। नए प्रस्ताव में कई लेन-देन की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे आम खर्चों में कागजी कार्यवाही कम होगी।
ड्राफ्ट नियम 2026 में क्या प्रस्ताव है?
- बैंक खातों में एक वित्तीय वर्ष के दौरान कुल नकद जमा या निकासी 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा होने पर ही पैन जरूरी होगा।
- मोटर वाहन की खरीद 5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर ही पैन देना होगा। दोपहिया वाहन भी इसी सीमा के बाद पैन के दायरे में आएंगे।
- होटल, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल, कन्वेंशन सेंटर या इवेंट मैनेजर को 1 लाख रुपये से ज्यादा भुगतान पर पैन जरूरी होगा।
- संपत्ति की खरीद, बिक्री, उपहार या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट 20 लाख रुपये से ज्यादा होने पर पैन अनिवार्य होगा।
- बीमा कंपनियों के साथ खाता-आधारित संबंध शुरू करने पर भी पैन देना होगा।
CBDT हितधारकों की राय लेने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी करेगा। मंजूरी मिलने पर ये नए नियम 1 अप्रैल से आयकर अधिनियम 2025 के साथ लागू हो जाएंगे।