अनाप-शनाप ब्याज वसूलने वालों को सरकार की चेतावनी, क्या सुधरेंगे लोन देने वाले ऐप?

सरकार ने छोटे लोन देने वाले ऐप्स और संस्थानों को चेतावनी दी है कि ब्याज दरें वाजिब रखें। अगर ब्याज दरें वाजिब हों और ज्यादा लोगों को वित्तीय दायरे में लाया जाए, तो आम जनता को राहत मिलेगी और सिस्टम पर दबाव भी घटेगा।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड13 Nov 2025, 05:54 PM IST
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अनाप-शनाप ब्याज वसूलने वालों को सरकार की चेतावनी, क्या सुधरेंगे लोन देने वाले ऐप?

आजकल लोन लेने का विकल्प सिर्फ सरकार या बैंक तक सीमित नहीं रह गया है। कई मोबाइल ऐप्स और माइक्रोफाइनेंस संस्थान अब आसानी से छोटे-छोटे कर्ज देने लगे हैं। लेकिन दिक्कत ये है कि ये ऐप्स और संस्थान लोन तो तुरंत दे देते हैं, मगर ब्याज दरें इतनी भारी-भरकम वसूलते हैं कि आम लोगों पर बोझ बढ़ जाता है। अब सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसे लोन देने वालों की लगाम कसनी होगी और ब्याज दरें वाजिब रखनी होंगी।

MFI की ब्याज दरें वाजिब नहीं: एम नागराजू

वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने छोटी राशि का कर्ज देने वाले कुछ माइक्रोफाइनेंस संस्थान (MFI) से वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए अपनी ब्याज दरें उचित रखने का आग्रह किया। नागराजू ने RBI द्वारा नियुक्त स्व नियामक संगठन, सा-धन के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मुझे कुछ MFI की ब्याज दरें संतोषजनक नहीं लगती हैं। वास्तव में ऐसा इन संस्थानों की अक्षमताओं के कारण होता है।’’

लागत और उत्पादकता पर जोर

नागराजू ने कहा कि अगर MFI अपनी लागत कम करें और उत्पादकता बढ़ाएं तो ब्याज दरें भी घटेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊंची ब्याज दरें उन लोगों को और मुश्किल में डाल देती हैं जिन्हें पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे लोग लोन तो ले लेते हैं, लेकिन चुकाने में असमर्थ रहते हैं। परिणामस्वरूप वित्तीय संस्थानों में दबाव वाली संपत्तियों में वृद्धि होती है।

दबाव वाले खातों में गिरावट

उन्होंने बताया कि इस सेक्टर में दबाव बढ़ रहा है। मार्च 2024 तक दबाव वाले खातों की संख्या 4.4 लाख थी, जो मार्च 2025 तक घटकर 3.4 लाख रह गई। इसका मतलब है कि ऊंची ब्याज दरों और चुकाने में दिक्कतों की वजह से वित्तीय संस्थानों पर बोझ बढ़ रहा है।

वित्तीय समावेश और महिला सशक्तीकरण

नागराजू ने कहा कि छोटे लोन देने वाले ये संस्थान वित्तीय समावेश और महिला सशक्तीकरण के लिए बेहद जरूरी हैं। ये घर-घर जाकर लोगों तक पहुंचते हैं और उन्हें संगठित वित्तीय चैनल से जोड़ते हैं। उन्होंने MFI से नए तरीके अपनाने की अपील की ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस दायरे में आएं।

करोड़ों युवा अब भी वित्तीय समावेश से बाहर

सचिव ने बताया कि देश में अभी भी 30–35 करोड़ युवा ऐसे हैं जो वित्तीय समावेश से बाहर हैं। सरकारी योजनाओं के बावजूद बड़ी आबादी अब भी संगठित चैनल का हिस्सा नहीं बन पाई है। उन्होंने कहा कि MFI को इस दिशा में नए कदम उठाने होंगे।

नाबार्ड का डिजिटल प्लान

इस मौके पर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष शाजी के वी ने कहा कि MFI सेक्टर में दबाव कम हो रहा है लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड स्वयं सहायता समूहों का डिजिटलीकरण कर रहा है और ग्रामीण क्रेडिट स्कोर बनाने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम उन छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों के साथ ग्रामीण क्रेडिट स्कोर के लिए कुछ पायलट परियोजना कर रहे हैं जो काफी गरीब लोगों को ऋण देते हैं।’’

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