एक अप्रैल, 2017 से पहले किए गए निवेशों के ट्रांसफर से प्राप्त इनकम को जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल्स (GAAR) के दायरे से बाहर कर दिया है। इससे उन निवेशकों को स्पष्टता और राहत मिलेगी जिनके पास पुराने एसेट्स हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ ने इस बात की जानकारी दी है। CBDT के इस फैसले से पुराने निवेशकों को राहत मिलेगी और टैक्स को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होगी।
CBDT की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में आयकर नियमों, 2026 के नियम 128 में बदलाव किया गया है। इसके तहत अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेशों से होने वाले फायदे को 'ग्रैंडफादरिंग' (विशेष छूट) प्रदान की गई है। बता दें कि GRR आयकर अधिनियम के तहत एक नियम है जो टैक्स अधिकारियों को मुख्य रूप से टैक्स बचाने के लिए की गई कृत्रिम व्यवस्थाओं को नजरअंदाज करने या बदलने की अनुमति देता है भले ही वे कागज पर कानूनी दिखती हों। इसे 2012 में पेश किया गया था लेकिन यह 1 अप्रैल, 2017 से लागू हुआ।
निवेश ट्रांसफर से होने वाली आय पर नहीं लगेगा टैक्स
स्पष्टीकरण में कहा गया है कि 1 अप्रैल, 2017 को या उससे पहले किए गए निवेश के ट्रांसफर हस्तांतरण से होने वाली आय के लिए जीएएआर प्रावधानों को लागू नहीं किया जाएगा। इस संशोधन से जनवरी में टाइगर ग्लोबल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पैदा हुई अनिश्चितता दूर होगी। यह जीएएआर पेश करते समय सरकार के मूल ग्रैंडफादरिंग उद्देश्य को मजबूत करता है।
नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जीएएआर 1 अप्रैल, 2017 को या उससे पहले किए गए पुराने निवेश के ट्रांसफर (पूंजीगत लाभ) से होने वाली आय को कवर नहीं करेगी। इसके साथ ही जीएएआर उन कर बचत व्यवस्थाओं पर लागू रहेगा, जहां 1 अप्रैल, 2017 से पहले खरीदे गए शेयरों का हस्तांतरण शामिल है।
जानिए क्या है ग्रैंडफादरिंग?
ग्रैंडफादरिंग एक ऐसा प्रावधान है जिसके तहत मौजूदा स्थितियों में पुराना नियम लागू रहता है जबकि नए नियम भविष्य के मामलों में लागू होते हैं। इससे वर्तमान संबंधित पक्षों को नए नियमों से छूट मिलती है। यह एक निश्चितता सुनिश्चित करता है, अचानक आने वाले अनुपालन खर्चों से सुरक्षा प्रदान करता है और नीतियों, निवेशों या उपयोगकर्ता मूल्य निर्धारण में निरंतरता बनाए रखता है।
वित्त वर्ष 2012-13 के केंद्रीय बजट में घोषित जीएएआर का उद्देश्य विदेशी निवेशकों द्वारा कर चोरी पर अंकुश लगाना था। इसका लक्ष्य उन संस्थाओं द्वारा कर चोरी को रोकना था जो ऐसी व्यवस्थाओं में भाग लेती हैं जो पात्र नहीं हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर विवाद भी उत्पन्न हुआ। निवेशकों ने आशंका जताई कि इससे कर अधिकारियों द्वारा अनावश्यक उत्पीड़न हो सकता है।