Health Insurance: इलाज पर महंगाई की मार! 80% लोगों के नहीं है बचत, सर्वे में बड़ा खुलासा

Health Insurance: महंगाई की मार अब इलाज पर भी पड़ने लगी है। 80% परिवारों के पास मेडिकल इमरजेंसी के लिए पर्याप्त फंड और बीमा की सही जानकारी नहीं है। इस बात का खुलासा एक सर्वे में हुआ है। आइये जानते हैं इस सर्वे में क्या - क्या कहा गया है।

Jitendra Singh
अपडेटेड7 Apr 2026, 05:54 PM IST
Health Insurance: ग्रामीण भारत में 85.9 प्रतिशत लोगों के पास स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं है।
Health Insurance: ग्रामीण भारत में 85.9 प्रतिशत लोगों के पास स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं है।

Health Insurance: आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस लेना बहुत जरूरी होता है। कब कौन बीमार हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस लेना बेहद जरूरी है। बढ़ते इलाज खर्च ने हेल्थ इंश्योरेंस की मांग बढ़ाई है। हालांकि बहुत से ऐसे लोग हैं, जो बढ़ती महंगाई की जवह से हेल्थ इंश्योरेंस नहीं ले पाते हैं। इस बीच अदित्य बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस की हालिया स्टडी ‘अ-Nishchit Index 2.0’ में एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। देश के ज्यादातर घरों में मेडिकल इमरजेंसी के लिए पैसे की तैयारी बेहद कमजोर है। लगभग 80 फीसदी परिवारों को लगता है कि उनके पास गंभीर बीमारी जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बचत नहीं है।

इसके साथ ही, 82 फीसदी लोग स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों से अपनी आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ने की चिंता में जी रहे हैं। ये आंकड़े 3,583 लोगों पर किए गए एक सर्वे से आए हैं। यह सर्वे देश के 20 शहरों और कस्बों में किया गया है। इसके अलावा, 21 लोगों से विस्तार से बातचीत (इंटरव्यू) भी किया गया है। यह इंडेक्स 11 अलग-अलग पैमानों और 49 तरह के सवालों/राय पर आधारित है, जिसमें भारत का कुल अनिश्चितता स्कोर 79 दर्ज किया गया है।

हेल्थ से जुड़े जोखिम के संकेत

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, सर्वे में कई ऐसी बातें सामने आई हैं जिनमें पता चलता है कि बीमारी से जुड़े खर्च लोगों के लिए बड़ा आर्थिक जोखिम बन रहे हैं। करीब 80 फीसदी लोगों को भरोसा नहीं है कि उनके पास गंभीर बीमारी के समय इलाज के लिए पर्याप्त बचत है। वहीं 82 फीसदी लोग मानते हैं कि इलाज महंगा होता जा रहा है और इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।

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Health Insurance Survey
(AI)

करीब 79 फीसदी लोगों को यह भी साफ नहीं है कि उनकी इंश्योरेंस पॉलिसी गंभीर बीमारियों में कितना कवर देती है। 81 फीसदी लोगों का मानना है कि प्रदूषण और बढ़ेगा, जिससे आगे चलकर बीमारियां और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। कुल मिलाकर इन आंकड़ों से पता चलता है कि स्वास्थ्य से जुड़े खर्च का जोखिम काफी बड़ा है, लेकिन उसके लिए तैयारी अभी भी कमजोर है।

प्रदूषण से बढ़ रही हैं बीमारियां

प्रदूषण से जुड़ी बीमारियां, तेज गर्मी और मौसमी बीमारियां बार-बार हो रही हैं। इससे इलाज, जांच और दवाइयों पर लगातार पैसा खर्च करना पड़ रहा है। अब पर्यावरण और मौसम से जुड़े कारण देश की चिंताओं में दूसरे नंबर पर आ गए हैं, जिसकी वजह से कुल अनिश्चितता स्कोर 79 तक पहुंच गया है। ऐसे में परिवार अब हेल्थ खर्च को बजट का एक जरूरी और नियमित हिस्सा मानने लगे हैं, न कि कोई अचानक आने वाला खर्च।

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