
Health Insurance Claim Rejection: मेरे पास तो मेडिक्लेम हैं। अस्पताल का मेरा सारा खर्च तो बीमा कंपनी उठाएगी... अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो जरा ठहरिए। दरअसल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कई तरह के क्लोज होते हैं, जिनमें आपका क्लेम फंस सकता है। आज हम आपको एक ऐसे ही नियम के बारे में बताने वाले हैं, जिसका आपको ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
अस्पताल में भर्ती होते ही अधिकतर लोग मान लेते हैं कि उनका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम आसानी से पास हो जाएगा। लेकिन पॉलिसी के भीतर छिपा रीजनेबल एंड कस्टमरी क्लॉज कई बार इलाज के बाद भी क्लेम को खारिज कर देता है।
ये क्लॉज बीमा कंपनियों को ये अधिकार देता है कि वे केवल उन्हीं खर्चों का भुगतान करें जिन्हें वे उचित और सामान्य मानती हैं। आसान शब्दों में कहें, तो बीमा कंपनी इलाज के लागत और अस्पताल में रुकने की समय पर सवाल उठा सकती है। इससे पेशेंट का खर्च बढ़ सकता है।
उदाहरण से समझे तो, एक ड्राइवर को गैस्ट्रोएन्टेराइटिस के इलाज के लिए भर्ती किया गया। इलाज के बाद 25,000 का बिल आया, लेकिन बीमा कंपनी उसे खारिज कर सकती है। रीजनेबल एंड कस्टमरी क्लॉज के अनुसार वो बिल को ये कहते हुए रिजेक्ट कर सकती है कि इस इलाज के लिए भर्ती होने की जरूरत नहीं है।
इसके अलावा अगर किसी मरीज की कोरोनरी आर्टरी सर्जरी होनी है। इस सर्जरी में 5 लाख का खर्च होता है, लेकिन मरीज ने 15 लाख का क्लेम किया, तो बीमा कंपनी उसे रिजेक्ट कर सकती है।
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