Health Insurance AQI: प्रदूषण से हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम 14% बढ़ा, बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

Health Insurance AQI: देश के कई राज्य प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। दीवाली से अब तक बढ़ते प्रदूषण की वजह से हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम करने वालों की संख्या में 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसमें वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा खतरा बढ़ रहा है।

Jitendra Singh
अपडेटेड17 Nov 2025, 06:21 PM IST
Health Insurance AQI: सांस और दिल की बीमारियों का इलाज महंगा हुआ है और खर्च 11% बढ़ा है।
Health Insurance AQI: सांस और दिल की बीमारियों का इलाज महंगा हुआ है और खर्च 11% बढ़ा है।

Health Insurance AQI: आज पूरी दुनिया विश्व प्रदूषण की मार झेल रहा है। प्रदूषण का सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। दिवाली के बाद वाले समय में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम्स में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले कुछ प्रदूषण की वजह से हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। साल 2022 में प्रदूषण से जुड़े क्लेम्स 6.4% थे, जो 2025 में बढ़कर 9% हो गए यानी 14% की वृद् हुई है। सिर्फ सितंबर 2025 में ही करीब 9% अस्पताल भर्ती प्रदूषण वाली बीमारियों से जुड़ी थीं। इनमें सांस की तकलीफ, हार्ट की समस्या, आंखों और त्वचा की एलर्जी जैसी दिक्कतें शामिल थीं।

पॉलिसीबाजार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण से लोगों की सेहत ही नहीं, बल्कि घरेलू बजट पर भी असर पड़ रहा है। रिपोर्ट में पाया गया कि प्रदूषण से जुड़ी हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम्स में करीब 43% बच्चे शामिल हैं। यानी बच्चे इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित समूह हैं। वहीं, सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों के इलाज का खर्च पिछले एक साल में 11 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसमें कहा गया है कि बच्चे किसी भी अन्य आयु वर्ग की तुलना में पांच गुना अधिक प्रभावित होते हैं।

यह भी पढ़ें | दिल्ली-मुंबई में रहना जेब पर भारी, जल्द बढ़ सकते हैं हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम!

दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण

प्रदूषण से होने वाली बीमारियां अब अस्पताल में भर्ती होने वाले सभी दावो का 8 फीसदी है। सांस और हार्ट संबंधी मामले भी इस वृद्धि में बड़ा योगदान दे रहे हैं। ऐसे बीमा दावों की संख्या के मामले में दिल्ली देश में सबसे आगे रहा है। वहीं बेंगलुरु और हैदराबाद में दावों का अनुपात ज्यादा रहा। जयपुर, लखनऊ और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों में भी मामलों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पता चलता है कि वायु प्रदूषण का असर महानगरों से आगे भी फैल रहा है।

यह भी पढ़ें | GST हटा, फिर भी प्रीमियम में 37% तक उछाल, बीमा कंपनियों ने कर दिया खेला

बच्चों पर प्रदूषण की मार

10 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रदूषण की सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। इस एज ग्रुप में 43 फीसदी क्लेम दर्ज हुए हैं। यह किसी भी अन्य एज ग्रुप से 5 गुना ज्यादा है। 31-40 साल के वयस्कों के क्लेम्स 14% और 60 साल से ऊपर के लोगों के 7% रहे। डेटा बताता है कि युवा और ज्यादा आउटडोर एक्टिव लोग खराब हवा के सीधे असर में हैं।

यह भी पढ़ें | हेल्थ इंश्योरेंस रिन्यूअल से पहले कंपनी पूछ रही हेल्थ अपडेट, ऐसे में क्या करें?

रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे वायु प्रदूषण एक पर्यावरणीय संकट से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में बदल गया है। इसमें पाया गया है कि प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों में वृद्धि ने इलाज की लागत में भी 11 प्रतिशत की वृद्धि की है। वायु प्रदूषण से जुड़ा औसत स्वास्थ्य बीमा दावा 55,000 रुपये था। वहीं औसत अस्पताल खर्च 19,000 रुपये प्रतिदिन था।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़मनीHealth Insurance AQI: प्रदूषण से हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम 14% बढ़ा, बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
More
बिजनेस न्यूज़मनीHealth Insurance AQI: प्रदूषण से हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम 14% बढ़ा, बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित