Health Insurance Claim: कोरोना वायरस महामारी के बाद से हेल्थ इंश्योरेंस का महत्व काफी बढ़ गया है। बीमारियों के कारण होने वाले खर्चों को सही तरह से मैनेज करने में एक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस हमारी काफी सहायता करता है। बीमा कवरेज न होने के कारण कई परिवारों को बमारी से इलाज में आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। किसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की पूरी और सही जानकारी को हासिल करके आप उसका सबसे अधिक और बेहतर लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए आपके पास क्लेम का बेहतर ऑप्शन होन चाहिए।
कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि लोगों को बीमारी के समय अपने हेल्थ इंश्योरेंस को क्लेम करने में काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है। इंश्योरेंस प्रोवाइडर के साथ कैशलेस या रीइंबर्समेंट क्लेम करना होता है। कैशलेस क्लेम सिर्फ आपके इंश्योरर के नेटवर्क हॅास्पिटल में ही पॅासिबल हैं। इसलिए आप जब दूसरे हॅास्पिटल में ट्रीटमेंट करवाना चाहते हैं तो इसके लिए रीइंबर्समेंट क्लेम करना होता है।
कौन सा क्लेम आपके लिए है बेहतर
हेल्थ इंश्योरेंस को क्लेम करने की प्रक्रिया या तो कैशलेस लेनदेन के जरिए की जाती है या फिर इसे मेडिकल क्लेम भरपाई यानी रीइंबर्समेंट के जरिए भी क्लेम किया जा सकता है। रीइंबर्समेंट की प्रक्रिया में पॉलिसी धारक इलाज पर होने वाला खर्च खुद से करता है, और बाद में उसे भरपाई के लिए क्लेम किया जाता है। कैशलेस क्लेम के मुकाबले, मेडिकल क्लेम भरपाई की प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है। क्लेम का ऑप्शन आपके लिए कौन सा बेहतर होगा, इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हेल्थ इंश्योरेंस एक्सपर्ट निखिल झा ने विस्तार से चर्चा की है। उ्होमे चार्ट के जरिए समझाया और कहा कि हमेशा कैशलेस चुनें, इससे आपका टाइम और एनर्जी बचती है और रीइंबर्समेंट के मुकाबले कम प्रॉब्लम होती है।
हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी में इन बातों का रखें ध्यान
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कवर का फायदा तभी मिलता है, जब अस्पताल में भर्ती होना पड़े। आमतौर पर आउटपेशेंट खर्च जैसे मामूली घाव का इलाज पॉलिसी से कवर नहीं होता है। अगर यह घटना किसी गंभीर चोट में बदल जाती है, तो क्रिटिकल इलनेस कवर या ऐड ऑन भी मददगार हो सकता है। इस तरह के क्लेम के लिए पुलिस रिपोर्ट (एफआईआर) या दूसरे कानूनी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। लिहाजा कोई कानूनी दस्तावेज हो, उसे संभालकर जरूर रखें। जब भी आप कोई हेल्थ इंश्योरेंस लें उसके नियम और शर्तों को ध्यान पूर्वक पढ़ लें।
हेल्थ इंश्योरेंस में GST खत्म
हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance)और लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance )पर लगने वाला पूरा 18% GST खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब इंडिविजुअल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना पहले से सस्ता हो गया है। पहले जब कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस पॉलिसी लेता था तो प्रीमियम पर 18% GST जुड़ जाता था। उदाहरण के लिए, अगर आपका सालाना प्रीमियम 20,000 रुपये था तो आपको 23,600 रुपये चुकाने पड़ते थे। अब यह घटकर सीधा 20,000 रुपये ही रह जाएगा। यानी प्रीमियम पर टैक्स का बोझ पूरी तरह खत्म हो गया है।