
Health Insurance: पर्सनल लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर लगने वाले प्रीमियम पर GST खत्म कर दिया गया है। इससे पहले स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी वसूला जाता था। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों को बड़ी राहत मिली है। महंगे प्रीमियम अब सस्ते हो गए हैं। इससे विदेशों में बसे भारतीय अब इलाज और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए तेजी से भारत की ओर रुख कर रहे हैं। डिजिटल इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म पॉलिसीबाजार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (Non-Resident Indians - NRIs) भारत में हेल्थ इंश्योरेंस जमकर खरीद रहे हैं।
NRIs की ओर से हेल्थ इंश्योरेंस खरीद में पिछले साल के मुकाबले 126 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। कम प्रीमियम, आसान डिजिटल प्रक्रिया और एआई आधारित टेलीमेडिकल जांच जैसी सुविधाओं की वजह से बढ़ावा मिला है। बता दें कि NRI अब भारतीय पॉलिसी को सिर्फ़ हेल्थकेयर सॉल्यूशन के तौर पर नहीं, बल्कि एक कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थकेयर सॉल्यूशन के तौर पर देखते हैं।
इंश्योरेंस कंपनियां NRI सेगमेंट के लिए 40 फीसदी तक कम प्रीमियम दे रही हैं, जिससे विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए इंडियन हेल्थकेयर एक सस्ता ऑप्शन बन गया है। ऐसे में विदेश में रहने वाले लोग भारत में रह रहे माता पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए बड़े पैमाने हेल्थ कवरेज ले रहे हैं।
पॉलिसीबाजार के हेल्थ इंश्योरेंस प्रमुख सिद्धार्थ सिंघल के मुताबिक, एआई आधारित मेडिकल जांच और पूरी तरह डिजिटल ऑनबोर्डिंग ने भौगोलिक सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया है। परिवार फ्लोटर पॉलिसियों और माता पिता के लिए अलग कवरेज लेने वालों की संख्या में क्रमशः 70 फीसदी और 60 फीसदी की वृद्धि हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि एनआरआई अब भारतीय स्वास्थ्य बीमा को दीर्घकालिक सुरक्षा के रूप में देख रहे हैं।
पॉलिसीबाजार की रिपोर्ट के मुताबिक,खाड़ी देशों का हिस्सा कुल एनआरआई ग्राहकों में लगभग 50 प्रतिशत है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत प्रमुख हैं। कम यात्रा समय और भारत में कम इलाज खर्च की वजह से मांग में इजाफा हुआ है। दरअसल, खाड़ी देशों में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 2000 से 3000 डॉलर तक पहुंच सकता है, वहीं भारत में समान कवरेज 120 से 300 डॉलर में आसानी से मिल जाता है।
यूरोप से भारतीय हेल्थ हेल्थ इंश्योरेंस की मांग में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहां गैर आपात सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में कई एनआरआई भारत आकर निजी अस्पतालों में जल्दी इलाज करवाना पसंद करते हैं। हिप रिप्लेसमेंट या मोतियाबिंद जैसी सर्जरी के लिए महीनों प्रतीक्षा करने की बजाय वे भारत में अपनी पॉलिसी के जरिए आसानी से इलाज करा लेते हैं। अमेरिका और कनाडा का संयुक्त योगदान 17 फीसदी है। इन देशों में इलाज का खर्च बहुत ज्यादा है। कई मामलों में हवाई यात्रा का खर्च जोड़ने के बाद भी भारत में सर्जरी कराना सस्ता पड़ता है।
एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अफ्रीका से 8 फीसदी मांग बढ़ी है। इन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय घुटना प्रत्यारोपण और हृदय संबंधी प्रक्रियाओं जैसे बड़े ऑपरेशन के लिए भारतीय बीमा योजनाओं को चुन रहे हैं। भारत में ऐसे इलाज 70 से 80 फीसदी तक सस्ते पड़ते हैं। एक करोड़ रुपये तक का कवर देने वाली पॉलिसी का सालाना प्रीमियम कई देशों में एक महीने के प्रीमियम से भी कम होता है।
फैमिली - फ्लोटर पॉलिसी में भी तेजी से इजाफा हुआ है। इनकी सालाना हिस्सेदारी 20 फीसदी से बढ़कर 70 फीसदी पहुंच गई है। औसतन बीमा राशि 25 लाख रुपये से ज्यादा है। जीएसटी में मिली छूट के बाद एनआरआई एक ही योजना के तहत पूरे परिवार को बेहतर कवरेज दे सकते हैं। इसी तरह माता पिता के लिए खरीदी जाने वाली पॉलिसी में भी 32 फीसदी से 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कई प्लान में कंसीयज (concierge) सर्विस भी शामिल है। इस सर्विस के जरिए विदेश में रहकर भी इलाज की प्रक्रिया को आसानी से मैनेज कर सकते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कवर का फायदा तभी मिलता है, जब अस्पताल में भर्ती होना पड़े। आमतौर पर आउटपेशेंट खर्च जैसे मामूली घाव का इलाज पॉलिसी से कवर नहीं होता है। अगर यह घटना किसी गंभीर चोट में बदल जाती है, तो क्रिटिकल इलनेस कवर या ऐड ऑन भी मददगार हो सकता है। इस तरह के क्लेम के लिए पुलिस रिपोर्ट (एफआईआर) या दूसरे कानूनी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। लिहाजा कोई कानूनी दस्तावेज हो, उसे संभालकर जरूर रखें। जब भी आप कोई हेल्थ इंश्योरेंस लें उसके नियम और शर्तों को ध्यान पूर्वक पढ़ लें।
हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance)और लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance )पर लगने वाला पूरा 18% GST खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब इंडिविजुअल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना पहले से सस्ता हो गया है। पहले जब कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस पॉलिसी लेता था तो प्रीमियम पर 18% GST जुड़ जाता था। उदाहरण के लिए, अगर आपका सालाना प्रीमियम 20,000 रुपये था तो आपको 23,600 रुपये चुकाने पड़ते थे। अब यह घटकर सीधा 20,000 रुपये ही रह जाएगा। यानी प्रीमियम पर टैक्स का बोझ पूरी तरह खत्म हो गया है।
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