छोटे शहरों में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की बिक्री में उछाल, मेट्रो शहर पिछड़े

Health Insurance Policy: पॉलिसीबाजार के डेटा से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत के हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट में स्ट्रक्चरल बदलाव आया है। इससे वित्त वर्ष 2026 में टियर 2, टियर 3 और ग्रामीण इलाकों में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की बिक्री में उछाल आया। हालांकि मेट्रो शहर इस मामले में पीछे रह गए।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड12 Dec 2025, 08:07 PM IST
Health Insurance Policy: छोटे शहरों में 62% नई हेल्थ बीमा पॉलिसी की बिक्री हुई।
Health Insurance Policy: छोटे शहरों में 62% नई हेल्थ बीमा पॉलिसी की बिक्री हुई।

Health Insurance Policy: आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस लेना बहुत जरूरी होता है। कब कौन बीमार हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस लेना बेहद जरूरी है। बढ़ते इलाज खर्च ने हेल्थ इंश्योरेंस की मांग बढ़ाई है। इसके चलते हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वहीं देश के छोटे शहरों में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। पॉलिसीबाजार की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में अब तक बिकी सभी नई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में करीब 62 फीसदी पॉलिसियां छोटे, कस्बाई इलाकों और ग्रामीण इलाकों में बिकी हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि टियर-2 शहरों में 10 से 14 लाख रुपये का बीमा खरीदने वाले लोगों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 26 में बढ़कर 47 फीसदी हो गई है, जो वित्त वर्ष 22 में 27 फीसदी थी। वहीं टियर-3 शहरों में इस दौरान हिस्सेदारी 24 फीसदी से बढ़कर 49 फीसदी हो गई है।

हेल्थ इंश्योरेंस की बढ़ी डिमांड

भारत के टियर 2, टियर 3 और ग्रामीण इलाकों में हेल्थ इंश्योरेंस की डिमांड में तेजी आई है। वहीं मेट्रो शहर इस मामले में पिछे रह गए हैं। पॉलिसीबाजार के डेटा के मुताबिक, टियर-2 शहरों में 10 से 14 लाख रुपये का बीमा खरीदने वाले लोगों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 26 में बढ़कर 47 फीसदी हो गई है, जो वित्त वर्ष 22 में 27 फीसदी थी। वहीं टियर-3 शहरों में इस दौरान हिस्सेदारी 24 फीसदी से बढ़कर 49 फीसदी हो गई है। टियर-2 और टियर-3 शहरों की स्वास्थ्य बीमा खरीद में हिस्सेदारी वित्त वर्ष 22 में क्रमशः 23 फीसदी और 31 फीसी थी, जो वित्त वर्ष 26 में बढ़कर क्रमशः 24 फीसदी और 38 फीसदी हो गई। इस बीच टियर-1 की हिस्सेदारी घटकर 38 फीसदी रह गई, जो वित्त वर्ष 22 में 46 फीसदी थी।

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हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी में इन बातों का रखें ध्यान

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कवर का फायदा तभी मिलता है, जब अस्पताल में भर्ती होना पड़े। आमतौर पर आउटपेशेंट खर्च जैसे मामूली घाव का इलाज पॉलिसी से कवर नहीं होता है। अगर यह घटना किसी गंभीर चोट में बदल जाती है, तो क्रिटिकल इलनेस कवर या ऐड ऑन भी मददगार हो सकता है। इस तरह के क्लेम के लिए पुलिस रिपोर्ट (एफआईआर) या दूसरे कानूनी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। लिहाजा कोई कानूनी दस्तावेज हो, उसे संभालकर जरूर रखें। जब भी आप कोई हेल्थ इंश्योरेंस लें उसके नियम और शर्तों को ध्यान पूर्वक पढ़ लें।

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हेल्थ इंश्योरेंस में GST खत्म

हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance)और लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance) पर लगने वाला पूरा 18% GST खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब इंडिविजुअल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना पहले से सस्ता हो गया है। पहले जब कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस पॉलिसी लेता था तो प्रीमियम पर 18% GST जुड़ जाता था। उदाहरण के लिए, अगर आपका सालाना प्रीमियम 20,000 रुपये था तो आपको 23,600 रुपये चुकाने पड़ते थे। अब यह घटकर सीधा 20,000 रुपये ही रह जाएगा। यानी प्रीमियम पर टैक्स का बोझ पूरी तरह खत्म हो गया है।

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