Consumer Court: जरूरत पड़ जाए तो कैसे करें कन्ज्यूमर कोर्ट में केस? समझिए पूरी प्रक्रिया

अगर कोई प्रोडक्ट खराब निकले या सर्विस से नुकसान हो, तो उपभोक्ता अदालत यानी कन्ज्यूमर कोर्ट में केस करना आसान और किफायती तरीका है। बिना वकील के भी इंसाफ मिल सकता है। बस कुछ दस्तावेज और प्रक्रिया की समझ होनी चाहिए। आइए जानें कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज करने की क्या है प्रक्रिया।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड7 Aug 2025, 03:42 PM IST
कन्ज्यूमर कोर्ट जाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
कन्ज्यूमर कोर्ट जाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें(Mint)

आजकल हम ऑनलाइन से लेकर दुकान तक, हर जगह कुछ न कुछ खरीदते रहते हैं, कभी मोबाइल, कभी कपड़े, कभी सर्विस। लेकिन अगर सामान खराब निकले या सर्विस बेकार निकले तब क्या करें? कई बार दुकानदार या कंपनी हमें टालने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कन्ज्यूमर कोर्ट यानी उपभोक्ता अदालत ही वो रास्ता है, जहां आम आदमी अपनी आवाज उठा सकता है।

उपभोक्ता यानी कन्ज्यूमर कौन होता है?

अगर आपने अपनी निजी जरूरत के लिए कोई सामान खरीदा है या कोई सर्विस ली है, तो आप एक उपभोक्ता हैं। ये चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, कैश में हो या किस्तों पर, आप कन्ज्यूमर माने जाएंगे। लेकिन अगर आप वो सामान या सर्विस आगे बेचने या कमर्शियल यूज के लिए ले रहे हैं, तो आप कन्ज्यूमर की श्रेणी में नहीं आएंगे।

कन्ज्यूमर कोर्ट में शिकायत कौन कर सकता है?

कोई भी उपभोक्ता जिसने नुकसान झेला हो जैसे:

  • उपभोक्ता के कानूनी वारिस या परिवार के सदस्य
  • कोई कन्ज्यूमर एसोसिएशन
  • राज्य या केंद्र सरकार (जनहित में)

शिकायत कहां और कैसे दर्ज करें?

कन्ज्यूमर कोर्ट तीन लेवल्स के होते हैं। इन तीनों लेवल्स में एक तय रकम तक के मामले सुलझाए जाते हैं। इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक,

  • डिस्ट्रिक्ट फोरम – जब मामला 50 लाख तक का हो
  • स्टेट कमीशन – 50 लाख से 2 करोड़ तक
  • नेशनल कमीशन – 2 करोड़ से ऊपर

जिस जगह से सामान खरीदा गया, या जहां दुकानदार की ब्रांच है, आप वहीं शिकायत फाइल कर सकते हैं।

केस फाइल करने से पहले क्या करें?

सीधे केस फाइल करने से पहले कोशिश करें कि दुकानदार या सर्विस प्रोवाइडर से बात करके मामला सुलझा लें। कई बार एक ईमेल या नोटिस भेजने से भी काम बन जाता है। अगर कोई समाधान नहीं मिलता, तभी अगला कदम उठाएं।

कन्ज्यूमर कोर्ट में केस कैसे फाइल करें? पूरी प्रक्रिया समझिए

कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अब उपभोक्ता कोर्ट में शिकायत करना पहले से कहीं आसान हो गया है और इसके लिए वकील की जरूरत भी नहीं पड़ती। जानिए स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:

1. सबसे पहले ये तय करें कि मामला किस कोर्ट में जाएगा

पैसे के हिसाब से: आपको कितने पैसे का नुकसान हुआ है या कितनी भरपाई चाहिए, उसके आधार पर तय होता है कि जिला कोर्ट में जाएं, राज्य स्तर की कोर्ट में या नेशनल कमीशन में।

जगह के हिसाब से: शिकायत वहीं फाइल की जा सकती है जहां दुकानदार या सर्विस देने वाला मौजूद हो, या जहां वो घटना हुई हो।

2. फाइलिंग फीस भरें

ये फीस उस रकम पर निर्भर करती है जितनी कीमत के सामान या सर्विस का मामला है। कोर्ट के लेवल के हिसाब से फीस तय होती है- जिला, राज्य या नेशनल।

3. शिकायत लिखें (Complaint Draft करें)

अपनी शिकायत को साफ और सीधी भाषा में लिखें - क्या हुआ, कब हुआ, कैसे हुआ और किस वजह से आपको नुकसान हुआ। हर जरूरी बात शामिल करें ताकि मामला पूरी तरह समझ में आ सके।

4. अपनी और सामने वाले की जानकारी दें

शिकायत में आपका नाम, पता और फोन नंबर साफ-साफ लिखा होना चाहिए। साथ ही, जिसके खिलाफ शिकायत है, उसका नाम और पता भी सही-सही लिखें।

5. शिकायत पर साइन करें

आपको खुद अपनी शिकायत पर साइन करने होंगे। अगर कोई और आपकी ओर से शिकायत कर रहा है, तो उसे आपका लिखित अनुमति-पत्र (authorisation letter) लगाना होगा।

6. जरूरी दस्तावेज साथ लगाएं

आपके पास जो भी प्रूफ है, वो शिकायत के साथ लगाना जरूरी है। जैसे- बिल या रसीद की कॉपी, जो भी एग्रीमेंट या खरीद का सबूत हो, दुकानदार या कंपनी को भेजा गया नोटिस (अगर भेजा गया हो)।

7. कितनी भरपाई चाहिए, ये साफ बताएं

आपको क्या चाहिए- रिफंड, नुकसान का मुआवजा, कोर्ट का खर्चा, या ब्याज, ये सब साफ-साफ लिखें। कितनी रकम किस कारण मांगी जा रही है, इसका पूरा ब्रेकअप दें।

8. कोर्ट के अधिकार की पुष्टि करें

ये भी लिखें कि क्यों आपका मामला इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है, और आप किस तरह की राहत चाहते हैं।

9. समय सीमा का ध्यान रखें

ध्यान रखें कि शिकायत घटना के 2 साल के अंदर ही दर्ज करनी होती है। अगर देर हो गई है, तो क्यों हुई, ये वजह बतानी होगी। कोर्ट चाहे तो देर को माफ कर सकती है।

10. शिकायत की कॉपियां और एफिडेविट जमा करें

आपको कुल 5 कॉपी जमा करनी होंगी- कोर्ट और सामने वाले हर पार्टी के लिए। साथ ही एक एफिडेविट भी देना होगा जिसमें आप कहेंगे कि जो भी बातें आपने लिखी हैं, वो पूरी तरह सही हैं।

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केस निपटाने में कितना समय लगता है?

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के हिसाब से, जिले वाली कंज्यूमर कोर्ट (डिस्ट्रिक्ट फोरम) को किसी केस को 3 महीने के अंदर निपटाना होता है, अगर उसमें किसी प्रोडक्ट की जांच नहीं करनी हो। लेकिन अगर जांच करनी पड़े तो ये समय 5 महीने तक हो सकता है। बड़ी यानी स्टेट या नेशनल कंज्यूमर कमिशन में केस थोड़ा ज्यादा टाइम ले सकते हैं, क्योंकि वहां केस ज्यादा जटिल होते हैं। लेकिन अब नियम सख्त हो गए हैं, ताकि शिकायतों का जल्दी हल निकाला जा सके।

क्या वकील की जरूरत होती है?

कंज्यूमर कोर्ट की सबसे बड़ी अच्छी बात ये है कि आपको केस लड़ने के लिए वकील रखने की जरूरत नहीं होती। पूरी प्रक्रिया को आसान और आम आदमी के लिए समझने लायक बनाया गया है। हालांकि, अगर मामला बहुत बड़ा या थोड़ा पेचीदा हो, तो वकील की मदद लेने से जीतने का मौका बढ़ सकता है।

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