Home Loan Tax Benefit Rules: हर किसी का सपना होता है कि उसका भी अपना घर हो, जहां पर वो अपने परिवार के साथ हंसी-खुशी रह सके। मिडिल क्लास अपने इस सपने को होम लोन के जरिए पूरा करता है। घर खरीदने के लिए लाखों रुपये चुकाने के बाद भी रजिस्ट्री में बहुत पैसा देना पड़ता है। ऐसे में काफी लोग रजिस्ट्री अपनी मम्मी के नाम पर करवा देते हैं। कई राज्यों में महिलाओं के नाम पर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने से स्टाम्प ड्यूटी में छूट भी मिलती है, जिसके कारण लोग मम्मी के नाम पर ही मकान लेना बेहतर समझते हैं। स्टाम्प ड्यूटी में छूट के बाद जब इनकम टैक्स सेविंग की बात आती है, तो यही एक छोटी सी चूक की वजह से सारी सेविंग पर पानी फिर जाता है।
काफी लोग मानते हैं कि घर अगर मम्मी के नाम पर है और EMI अपनी सैलरी से भरेंगे, तो टैक्स छूट का फायदा मिल जाएगा। हालांकि, ये सच नहीं है। यदि आपने होम लोन लिया है और उसकी ईएमआई आप खुद अपनी गाढ़ी कमाई से भर रहे हैं, लेकिन मकान की रजिस्ट्री केवल आपकी मम्मी के नाम पर है, तो आपको छूट नहीं मिलेगी।
आयकर अधिनियम (Income Tax Act, 1961) के तहत होम लोन के मूलधन और ब्याज दोनों पर टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए इनकम टैक्स विभाग ने दो बुनियादी शर्तें तय की हैं।
- आप उस संपत्ति/घर के सह-मालिक होने चाहिए।
- आप होम लोन के सह-आवेदक हों और ईएमआई का वास्तविक भुगतान खुद कर रहे हों।
यदि आप इन दोनों में से किसी एक शर्त को भी पूरा नहीं करते हैं, तो आयकर कानून की नजर में आप टैक्स छूट के हकदार नहीं माने जाएंगे।
क्या सिर्फ ईएमआई चुकाने से मिलेगी टैक्स छूट?
अक्सर लोग सोचते हैं कि जब लोन की ईएमआई मेरे बैंक अकाउंट से कट रही है और लोन अप्रूवल लेटर में मेरा नाम है, तो टैक्स छूट भी मुझे ही मिलनी चाहिए। लेकिन आयकर विभाग का नियम इस मामले में बेहद सख्त है।
यदि मकान का पूरा मालिकाना हक सिर्फ आपकी मम्मी के पास है और आपका नाम रजिस्ट्री या सेल डीड में दर्ज नहीं है, तो बैंक की नजर में आप भले ही लोन चुकाने वाले व्यक्ति हों, लेकिन आयकर कानून के तहत आप सिर्फ एक गारंटर या लोन चुकाने वाले व्यक्ति हैं। प्रॉपर्टी में आपकी कोई कानूनी हिस्सेदारी न होने के कारण आपको सेक्शन 24(b) (ब्याज पर छूट) और सेक्शन 80C के तहत एक रुपये का भी टैक्स फायदा नहीं मिलेगा।
अब क्या कैसे निकाले समाधान?
अगर आपने घर की रजिस्ट्री सिर्फ मम्मी के नाम पर करा ली है और अब टैक्स छूट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो आप कानूनी रूप से कुछ रास्ते अपना सकते हैं। आपकी मम्मी चाहें तो मकान का एक हिस्सा (जैसे 30%, 40% या 50%) आपके नाम पर 'गिफ्ट डीड' के जरिए ट्रांसफर कर सकती हैं। एक बार रजिस्ट्री में आपका नाम सह-मालिक के रूप में जुड़ गया, तो आप अपने हिस्से के लोन पर टैक्स छूट के हकदार हो जाएंगे।