
Home Loan Guide: अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए होम लोन एक बड़ा सहारा होता है। हालांकि, आवेदन प्रक्रिया के दौरान छोटी सी चूक भी आपके सपनों पर पानी फेर सकती है। नोब्रोकर की हालिया रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर खरीदार लोन की बारीकियों को समझने में गलती कर देते हैं। इस खबर में हम आपको उन गलतियों और उनके समाधान के बारे में विस्तार से बताएंगे ताकि आपका लोन आसानी से मंजूर हो सके।
अक्सर लोग अपनी नेट इनकम को देखे बिना ही बहुत ज्यादा ईएमआई तय कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी आय और ब्याज दरें हमेशा स्थिर रहेंगी। नोब्रोकर के सह-संस्थापक और सीईओ अमित अग्रवाल का कहना है कि ईएमआई आपकी मासिक इनकम के 30-35% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वह सलाह देते हैं कि लोगों को लंबी अवधि वाला लोन चुनना चाहिए ताकि हर महीने जाने वाली किस्त कम रहे। साथ ही, मुश्किल समय के लिए हमेशा एक इमरजेंसी फंड भी बचाकर रखना चाहिए।
घर खरीदते समय लोग सिर्फ मंथली ईएमआई पर ही फोकस करते हैं। वे अक्सर स्टाम्प ड्यूटी (5-7%), रजिस्ट्रेशन फीस, ब्रोकरेज और प्रोसेसिंग फीस जैसे शुरुआती खर्चों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसके बाद में होने वाले मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और प्रॉपर्टी टैक्स को भी बजट में शामिल नहीं किया जाता है। अमित अग्रवाल के मुताबिक, जब भी आपके पास अतिरिक्त पैसे हों, तो लोन का प्री-पेमेंट कर देना चाहिए। इससे ब्याज का बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।
लोन लेने वालों को लगता है कि अच्छा क्रेडिट स्कोर और अच्छी सैलरी ही लोन दिलाने के लिए काफी है। लेकिन बैंक आपकी जॉब की स्थिरता, बिजनेस की उम्र और वित्तीय अनुशासन को भी गहराई से देखते हैं। अगर आप फ्रीलांसर हैं या आपकी प्रॉपर्टी के दस्तावेजों में कोई कमी है, तो आपको लोन मिलने में दिक्कत आ सकती है। बैंक लोन देने से पहले आय के अनुपात (FOIR) और प्रॉपर्टी की वैल्यू (LTV) जैसे कड़े पैमानों की जांच करते हैं।
विशफिन (Wishfin) के सीईओ ऋषि मेहरा का कहना है कि अक्सर पुराने या अधूरे दस्तावेजों की वजह से लोन अप्रूवल में देरी होती है। कई बार लोग मोबाइल से फोटो खींचकर दस्तावेज भेज देते हैं, जबकि हाई-रिजॉल्यूशन स्कैन का उपयोग करना चाहिए। दस्तावेजों में नाम का मेल न खाना, फ्लोर प्लान गायब होना या 3 महीने से पुराने बिजली बिल जमा करना जैसी गलतियां भारी पड़ सकती हैं। लोन के लिए हमेशा ताजा और स्पष्ट डॉक्यूमेंट्स ही जमा करें।
हर बैंक की नीतियां अलग होती हैं। अगर कोई सैलरी पाने वाला व्यक्ति ऐसी संस्था के पास जाए जो बिजनेस वालों को लोन देती है, तो उसे परेशानी होगी। इसी तरह पुरानी पुरानी संपत्तियों (Resale Properties) के लिए बैंकों के नियम काफी सख्त होते हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आपको कई बैंकों के बारे में रिसर्च करनी चाहिए। शुरुआत उस बैंक से करें जहां आपका पहले से खाता है, क्योंकि वहां आपको प्राथमिकता मिल सकती है।
जिन लोगों की आय स्थिर नहीं है, उनके लिए बैंक ज्यादा सतर्क रहते हैं। मोंगा और कथुरिया जैसे विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-वेतनभोगी लोगों को अपने ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट अपडेट रखने चाहिए। उनके बैंक स्टेटमेंट में बिजनेस का कैश फ्लो साफ दिखना चाहिए। ऐसे आवेदकों के लिए एक मजबूत क्रेडिट स्कोर और ज्यादा डाउन पेमेंट करना फायदे का सौदा हो सकता है। इससे बैंक का भरोसा बढ़ता है और लोन मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई राय एक्सपर्ट्स के हैं। लोन संबंधी कोई निर्णय लेने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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