यहां तो 60 हजार महीना मेंटनेंस चार्ज ही लग जाता है, ऐसे अपार्टमेंट आखिर हैं कहां?

Luxury Apartments in Metro Cities: अगर हम दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों की बात करें, तो यहां 3,000 स्क्वायर फीट के आलीशान अपार्टमेंट के लिए हर महीने आपको 40 से 60 हजार रुपये का मेंटनेंस खर्च देना पड़ सकता है।

Shivam Shukla
पब्लिश्ड16 May 2025, 05:00 PM IST
यहां तो 60 हजार महीना मेंटनेंस चार्ज ही लग जाता है, ऐसे अपार्टमेंट आखिर हैं कहां?
यहां तो 60 हजार महीना मेंटनेंस चार्ज ही लग जाता है, ऐसे अपार्टमेंट आखिर हैं कहां?

Luxury House in Metro Cities: भारत में सभी सपना होता है कि उनके पास एक बड़ा घर हो, जिसमें सारी सुविधाएं मौजूद रहे। घर सुकून तो देता है, लेकिन इससे जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। अगर हम दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों की बात करें, तो यहां 3,000 स्क्वायर फीट के आलीशान अपार्टमेंट के लिए हर महीने आपको 60 हजार रुपये तक का मेंटेनेंस खर्च देना पड़ सकता है। ऐसे में केवल EMI के भरोसे घर नहीं खरीदा बेहद मुश्किल है। यह आपके लिए एक सरदर्द शाबित हो सकता है और परिवार का और परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा खा सकता है। ऐसे में घर खरीदने से पहले आपको कास्ट ऑफ ऑनरशिप का पता लगाना चाहिए।

40 की उम्र बड़ा घर खरीदना सकून या बोझ?

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रॉपटेक कंपनी Micro Mitti के फाउंडर और सीईओ मनोज धनोतिया ने बताया, 40 साल की उम्र में बड़ा घर खरीदना दिल को सुकून तो जरूर देता है, लेकिन ये फैसला दिल और दिमाग दोनों से लेना चाहिए। मेट्रो शहरों में 3,000 स्कावयर फुट से बड़ा अपार्टमेंट लेने का मतलब है हर महीने 25,000 से 60,000 रुपये तक का मेंटेनेंस खर्च देना। यानी 10 साल में ये खर्च 30 से 70 लाख रुपये तक हो सकता है। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, इंश्योरेंस और समय-समय पर होने वाली मरम्मत का खर्च शामिल नहीं है।

छोटे शहरों में थोड़ी राहत

हालांकि, इंदौर जैसे छोटे शहरों में यह खर्च अभी थोड़ा कम है। यहां मेंटेनेंस खर्च हर महीना 7000 से 15000 रुपये तक हो सकता है। लेकिन जैसे-जैसे डेवलपर्स इन शहरों में भी लग्जरी प्रोजेक्ट्स और हाई-राइज बिल्डिंग्स ला रहे हैं, वहां भी मेंटेनेंस का खर्च बढ़ रहा है। रियल एस्टेट में सिर्फ ये मायने नहीं कि आपने क्या खरीदा, बल्कि ये भी कि आप उसे कितना मेंटेन कर सकते हैं।

केवल EMI से नहीं चलेगा काम

वहीं, मार्केट रेगुलेटरी SEBI से रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर गौरव गोयल ने सलाह दी कि मेंटेनेंस एक नियमित खर्च है और इसे महंगाई के साथ जोड़कर देखना चाहिए। ज्यादा मेंटेनेंस खर्च बाद में सिरदर्द बन सकता है और परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा खा सकता है। ऐसे में सिर्फ EMI का बजट बनाकर नहीं चला जा सकता है। आपको ‘टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप’ का गणित भी समझना होगा।

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