म्यूचुअल फंड, शेयर, SIP… तेजी से बदला है निवेश का पैटर्न, भारतीय परिवारों पर आई यह रिपोर्ट आपको भी पढ़नी चाहिए

भारतीय अब डिपॉजिट जैसे पारंपरिक निवेश के बजाय म्यूचुअल फंड और इक्विटी में तेजी से पैसा लगा रहे हैं। निवेश योग्य संपत्ति में MF की हिस्सेदारी 2015 के 4% से बढ़कर 2025 में 9% हो गई है, जबकि डिपॉजिट की हिस्सेदारी घटकर 49% हो गई है। छोटे शहर, महिलाएं और युवा निवेशक इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

Naveen Kumar Pandey
पब्लिश्ड9 Dec 2025, 04:07 PM IST
भारतीय परिवारों में बदल रहा है निवेश का पैटर्न (AI Generated Graphic)
भारतीय परिवारों में बदल रहा है निवेश का पैटर्न (AI Generated Graphic)(Notebook LM)

बैन एंड कंपनी (Bain & Company) ने ग्रोव (Groww) के साथ मिलकर 'हाउ इंडिया इन्वेस्ट्स 2025' नाम से एक रिपोर्ट जारी की है, जो भारतीय परिवारों की निवेश की आदतों और संपत्ति में बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। यह रिपोर्ट बताती है कि 2025 के अंत तक देश में घरेलू संपत्ति काफी बढ़ जाएगी। निवेशकों का रुझान अब बैंकों में पैसा जमा करने के बजाय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की तरफ बढ़ रहा है, जो देश की बदलती आर्थिक तस्वीर को दर्शाता है।

घरेलू संपत्ति में होगा बड़ा उछाल

रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, भारतीय परिवारों की कुल संपत्ति 2025 के आखिर तक 1,300 से 1,400 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इस कुल संपत्ति में निवेश योग्य संपत्ति का हिस्सा भी बढ़ रहा है। एक दशक पहले यह हिस्सा 28% था, जो बढ़कर 35% होने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि भारतीय परिवार न सिर्फ संपत्ति बना रहे हैं, बल्कि उसे निवेश के लिए भी ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

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म्यूचुअल फंड और इक्विटी बने पसंदीदा निवेश

भारतीय अब तेजी से म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और सीधे शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं। ये निवेश अब डिपॉजिट से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। निवेश योग्य संपत्ति में म्यूचुअल फंड का हिस्सा 2015 में 4% था, जो 2025 में बढ़कर 9% हो जाएगा। यह 22% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है।

वहीं, लिस्टेड इक्विटी (Stock Market) की हिस्सेदारी भी इस दौरान 29% से बढ़कर 37% हो गई है, जिसकी वृद्धि दर 16% CAGR है। इसके उलट, डिपॉजिट (बैंक में जमा पैसे) का हिस्सा 63% से घटकर 49% हो गया है, जिसकी CAGR महज़ 11% है। यह ट्रेंड बताता है कि निवेशक अब ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में जोखिम भरे माने जाने वाले एसेट क्लास (Asset Class) को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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विकसित देशों से तुलना और भविष्य की संभावनाएं

भले ही भारत में म्यूचुअल फंड और लिस्टेड इक्विटी में निवेश तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में यह अभी भी काफी कम है। भारत में कुल निवेश योग्य संपत्ति में इन दोनों का हिस्सा 15-20% है। यह कनाडा (52-59%), अमेरिका (50-60%), ब्राजील (40-45%), और ब्रिटेन (38-42%) जैसे देशों से काफी कम है। इस अंतर से पता चलता है कि भविष्य में भारत में इस तरह के निवेश में विकास की बहुत बड़ी गुंजाइश है।

छोटे शहरों, महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी

बाजार की पहुंच अब बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों तक फैल रही है। टॉप 110 शहरों के बाहर के शहरों से म्यूचुअल फंड AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) का योगदान वित्तीय वर्ष 2018-19 (FY19) में 10% था, जो बढ़कर 19% हो गया है।निवेश के क्षेत्र में महिलाएं भी बड़ी संख्या में आ रही हैं। वित्त वर्ष 2019 के बाद से उनका औसत म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो 23% बढ़ा है, जबकि पुरुषों के लिए यह वृद्धि 5% रही है। वहीं, युवा निवेशक भी शेयर बाजार को चला रहे हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में रजिस्टर हुए निवेशकों में से 40% की उम्र 30 साल से कम है। FY19 में यह आंकड़ा 23% था।

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SIP की लोकप्रियता में बड़ा उछाल

निवेशकों के बीच सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) यानी व्यवस्थित निवेश योजनाएं सबसे ज्यादा पसंदीदा तरीका बन गई हैं। FY19 में कुल व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड AUM में SIP की हिस्सेदारी 19% थी, जो बढ़कर 40% हो गई है। यह दिखाता है कि निवेशक अब अनुशासित और नियमित तरीके से निवेश करना पसंद कर रहे हैं।

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