How Are Gold Rates Calculated In India: भारत में सोना एक एसेट के साथ-साथ आस्था का भी प्रतीक है। यहां शादी-विवाह हो या फिर त्योहार से निवेश तक हर मौके पर इसकी मांग रहती है। साल 2025 में सोना ने अब तक 66 प्रतिशत की शानदार बढ़त हासिल की है। मॉर्गन स्टैनली की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास जून 2025 तक लगभग करीब 34,600 टन सोना जमा है, जिसकी कीमत लगभग 3.8 अरब डॉलर है। यह भारत के कुल GDP का 88.8 फ़ीसदी है। यानी सोने की चमक ने घरेलू संपत्ति को भारी बूस्ट दिया है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये कीमतें तय कैसे होती हैं? क्या सिर्फ त्योहारों का सीजन या वेडिंग सीजन ही जिम्मेदार हैं? आइए विस्तार से जानते हैं।
महंगाई से बढ़ती है सोने की कीमत
जब रोजमर्रा के सामानों की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई बढ़ जाती है। पैसे की कीमत घटती है। ऐसे में बैंक की ब्याज दरें या शेयर बाजार पर भरोसा कम हो जाता है। लोग सुरक्षित निवेश के लिए सोने की तरफ भागते हैं। लिहाजा, डिमांड बढ़ती है और कीमतों में उछाल आता है।
डॉलर में उतार-चढ़ाव का पड़ता है असर
वहीं, अमेरिकी डॉलर भी सोने की कीमतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल, जब डॉलर कमजोर होता है तो दूसरी करेंसी में सोना सस्ता हो जाता है, जिससे खरीदारी बढ़ती है और कीमतें ऊपर चली जाती हैं।
ब्याज दरों की भी अहम भूमिका
इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व जब ब्याज दरें बढ़ाता है तो बॉन्ड और डॉलर ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। सोना ब्याज नहीं देता,इसलिए डिमांड कम हो जाती है। लेकिन जैसे ही दरें घटने का सिलसिला शुरू होता है, सोना फिर से निवेशकों की पहली पसंद बन जाता है।
जियोपॉलिटिकल टेंशन
इसके अलावा, पिछले पांच साल में दुनिया ने कोरोना महामारी, कई युद्ध, बैंकिंग संकट और रिकॉर्ड महंगाई देखी है। ऐसे अनिश्चित दौर में सोना ही एकमात्र संपत्ति है जिस पर भरोसा रहता है। जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर निवेशक सेफ इन्वेस्टमेंट की तरफ भागते हैं, जिसकी वजह से सोने की कीमतें बढ़ती हैं।
वेडिंग और फेस्टिव सीजन
भारत में साल भर वेडिंग और फेस्टिवल चलते रहते हैं। सोना खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसे में लोग जमकर सोना खरीदते हैं, जो कीमतों को बढ़ता है।
कस्टम ड्यूटी और GST
सरकार ने दो साल पहले सोने पर कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। इससे सोना सस्ता होना चाहिए था, लेकिन ग्लोबल कीमतों की वजह से कीमतों में राहत नहीं मिली। अभी भी सोने पर 3 फीसदी जीएसटी और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज पर अलग से 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। मेकिंग चार्ज शहर और दुकान के हिसाब से अलग-अलग होते हैं, लेकिन ये भी कुल कीमत में अच्छा-खासा इजाफा करते हैं।